निर्देशक : सुजीत

लेखक : सुजीत (मूल कहानी और संवाद), अब्बास दलाल और हुसैन दलाल (हिंदी संवाद)

कलाकार : प्रभाष, श्रद्धा कपूर, नील नितिन मुकेश, मुरली शर्मा, चंकी पांडेय, मंदिरा बेदी, जैकी श्रॉफ

रेटिंग : 2.5/5

साल की सबसे बड़ी फिल्म बताई जा रही ‘साहो’ के लिए प्रशंसकों में कितना उत्साह था, इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि बीते एक हफ्ते से ट्विटर पर रोज फिल्म से जुड़ा कोई न कोई हैशटैग ट्रेंड कर रहा था. लेकिन फिल्म के साथ पहली गड़बड़ यह हुई कि शुक्रवार की सुबह होने वाले इसके ज्यादातर शो कैंसिल कर दिए गए. बताया जा रहा है कि नोएडा-दिल्ली सहित उत्तर भारत के कई शहरों में फिल्म का प्रिंट सही समय पर न पहुंच पाने के चलते ऐसा हुआ है. करीब 350 करोड़ रुपये के बजट में बनाई गई किसी फिल्म के साथ ऐसा होना, बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है.

गैंगवॉर और चोर-पुलिस ड्रामा को मिलाकर तैयार की गई यह एक्शन फिल्म एक विजुअल ट्रीट है. रिवेंज, रोमांस और कुछ छिपे रहस्य यानी एक्शन फिल्मों में मौजूद रहने वाला हर मसाला डाले जाने के चलते ‘साहो’ की पटकथा में रोमांच ढेर सारा है. लेकिन इसके बावजूद कहानी बिल्ड-अप में बहुत समय लेती है. इसी के चलते फिल्म का पहला हिस्सा बहुत लंबा लगता है और एक हद के बाद बोर भी करता है. तिस पर बीच-बीच में आ रहे गाने भी अपने एलियन स्वरूप के चलते चौंका देते हैं.

हालांकि फिल्म के दूसरे हिस्से में एक के बाद एक आने वाले शानदार ट्विस्ट इसकी थोड़ी भरपाई करते हुए जरूर लगते हैं. इन दृश्यों में नायक को दस-दस बाहुबलियों से एक साथ लड़ते, रफ्तार से गाड़ियां भगाते और धड़ाधड़ चलती गोलियों के बीच रोमांस करते देखा जा सकता है. इन लंबे-लंबे एक्शन सीक्वेंसों का तो ऐसा है कि एक खतम होता है तो पांच मिनट के अंतराल के बाद दूसरा शुरू हो जाता है. हालांकि इनमें दक्षिण भारतीय फिल्मों वाली वह हिंसा ज्यादा है जो वीभत्स रस के करीब लगती है और कई बार अविश्वसनीय भी लगती है. लेकिन इनके साथ पिरोए गए ट्विस्ट इन्हें बर्दाश्त करने की वजह दे देते हैं. इसके अलावा क्लाइमैक्स को बोलकर एक्सप्लेन किया जाना भी आपको थोड़ा खटकता है.

‘साहो’ के जरिए ‘बाहुबली’ प्रभाष तकरीबन दो साल बाद परदे पर वापसी कर रहे हैं. इस वापसी में उनकी आन-बान-शान जरा भी कम नहीं हुई है. विशालकाय सेट्स, शानदार कारें और स्टाइलिश कॉस्ट्यूम के साथ उनकी कमाल की स्क्रीन प्रजेंस कुछ प्रभावी दृश्यों की वजह बनते हैं. हालांकि फिल्म में वे अभिनय बहुत बढ़िया नहीं करते लेकिन एक्शन कमाल का दिखाते हैं. वहीं डबिंग के लिए दक्षिण भारतीय उच्चारण के साथ बोली गई उनकी हिंदी भी आपका ध्यान खींचती है.

प्रभाष के अलावा श्रद्धा कपूर, नील नितिन मुकेश और चंकी पांडेय मुख्य भूमिकाओं में हैं और ठीक-ठाक काम करते हैं. श्रद्धा कपूर परदे पर सुंदर लगती हैं और बहुत अच्छा अभिनय न करने के बावजूद इस बार अपने एक्शन से थोड़े ज्यादा नंबर बटोर लेती हैं. एक छोटी सी भूमिका में मंदिरा बेदी भी हैं जो अपना काम तो अच्छे से करती है लेकिन उससे ज्यादा अपने साड़ी वाले स्वैग से दिल जीतती हैं.

तेलुगु, तमिल, मलयालम और हिंदी में रिलीज हुई ‘साहो’ का निर्देशन युवा तेलुगु निर्देशक सुजीत ने किया है. पांच साल पहले जब उन्होंने तेलुगु फिल्म ‘रन राजा रन’ से डेब्यू किया था तब उनकी उम्र महज 23 साल थी. ‘साहो’ उनकी दूसरी फिल्म है. बड़े बजट की इस बड़ी फिल्म में सुजीत के कम अनुभव के चलते पैदा हुई खामियां कई बार दिखाई देती हैं. फिल्म के बाकी हिस्सों पर आएं तो यहां संगीत औसत और गानों की प्लेसिंग खराब है. लेकिन लोकेशन्स और सिनेमैटोग्राफी कमाल की है. सबसे बड़ी कसर एडिटिंग में रह गई है. इसलिए अगर आप प्रभाष के फैन और लंबे-लंबे फाइटिंग दृश्यों के शौकीन हैं तो ही यह फिल्म देखने जाइए!