देश की आर्थिक वृद्धि दर 2019-20 की अप्रैल-जून तिमाही में घटकर पांच प्रतिशत रह गयी है. पिछले छह सालों में यह आर्थिक वृद्धि का न्यूनतम स्तर है. शुक्रवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों में यह जानकारी दी गयी है.

इस साल जनवरी-मार्च की तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर घटकर 5.8 फीसद पर आ गई थी. लेकिन, 2019 की अप्रैल से जून की तिमाही में यह और घटकर पांच फीसद पर आ गई है. 2012-13 के बाद यह पहला मौका है, जब आर्थिक वृद्धि दर इतनी कम रही है. 2012-13 की जनवरी से मार्च की तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर 4.9 प्रतिशत पर रही थी. आर्थिक वृद्धि में गिरावट की सबसे बड़ी वजह विनिर्माण क्षेत्र और कृषि उत्पादन की सुस्ती को बताया गया है.

भारतीय रिजर्व बैंक ने जून में हुई मौद्रिक समीक्षा में चालू वित्तीय वर्ष की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान सात प्रतिशत से घटाकर 6.9 प्रतिशत कर दिया था. साथ ही केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष की पहली छमाही में जीडीपी वृद्धि दर के 5.8 प्रतिशत से 6.6 प्रतिशत और दूसरी छमाही में 7.3 प्रतिशत से 7.5 प्रतिशत के दायरे में रहने का अनुमान जताया था.