असम के लाखों लोगों की जिंदगी का आज फैसला होने वाला है. राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) की अंतिम सूची आज प्रकाशित होगी. इस लिस्ट में जिन लोगों के नाम नहीं शामिल होंगे, उन्हें या तो कैंपों में रहना होगा या दूसरे देश भेज दिया जाएगा. सूची जारी होने से पहले मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने शुक्रवार को असम के लोगों से कहा कि वे एनआरसी को लेकर घबराएं नहीं.

सोनोवाल ने कहा कि राज्य सरकार अपनी नागरिकता साबित करने में उन लोगों की मदद करने के लिए हरसंभव कदम उठाएगी जो वास्तव में भारतीय हैं. मुख्यमंत्री ने इन लोगों को कानूनी सहायता मुहैया कराने का भी आश्वासन दिया. उन्होंने यह भी कहा कि शनिवार को प्रकाशित होने वाली एनआरसी की अंतिम सूची से यदि किसी का नाम बाहर रह जाता है, तो इसका यह अर्थ नहीं है कि वह विदेशी बन गया है, क्योंकि उचित कानूनी प्रक्रिया के बाद विदेशी न्यायाधिकरण (एफटी) ही इस संबंध में निर्णय ले सकता है.

पीटीआई के मुताबिक मुख्यमंत्री सोनोवाल ने कहा, ‘एनआरसी से नाम बाहर रखे जाने का यह मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति अपने आप ही विदेशी बन जाएगा. केवल विदेशी न्यायाधिकरण के पास ही किसी व्यक्ति को विदेशी घोषित करने का अधिकार है, किसी और के पास यह अधिकार नहीं है. यदि किसी को विदेशी घोषित कर भी दिया जाता है, तो भी वह व्यक्ति विदेशी न्यायाधिकरण के आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दे सकता है और यदि वह तब भी संतुष्ट न हो, तो वह उच्चम सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकता है.’

मुख्यमंत्री भले ही लोगों को तमाम आश्वासन दे रहे हों, लेकिन उनमें एनआरसी को लेकर डर का माहौल है. हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक कई लोगों ने कहा है कि वे इस मुद्दे पर लंबी लड़ाई लड़ने को तैयार है. असम के एक व्यक्ति ने कहा, ‘हम काफी ज्यादा चिंतित हैं. हमें नहीं पता कि अगर (सूची में) हमारा नाम नहीं हुआ तो हम क्या करेंगे.’ इससे पहले 30 जुलाई, 2018 को प्रकाशित हुए एनआरसी के अस्थायी ड्राफ्ट में असम के करीब 3.29 करोड़ आवेदकों में से 2.9 करोड़ आवेदकों के नाम शामिल थे. करीब 41 लाख लोगों को इससे बाहर कर दिया गया था. तब इस मुद्दे पर काफी हंगामा हुआ था.