इतिहास में 31 अगस्त का दिन प्रसिद्ध कवयित्री, उपन्यासकार और निबंधकार अमृता प्रीतम के जन्मदिन के रूप में दर्ज है. साल 1919 में आज ही के दिन (पाकिस्तान वाले) पंजाब के गुजरांवाला में जन्मीं अमृता प्रीतम को पंजाबी भाषा की सर्वश्रेष्ठ कवयित्री माना जाता है. उन्होंने किशोरावस्था से ही पंजाबी में कविता, कहानी और निबंध लिखना शुरू कर दिया था. वे उन विरले साहित्यकारों में से एक हैं जिनका संकलन महज 16 साल की उम्र में प्रकाशित हुआ.

अमृता प्रीतम की रचनाओं में देश के विभाजन का दर्द साफ महसूस किया जा सकता है. दिल्ली में बसने के बाद उन्होंने हिंदी में भी लिखना शुरू किया. उन्होंने लगभग सौ किताबें लिखीं. इनमें से कइयों का हिंदी में अनुवाद हुआ. साहित्य में अपने योगदान के लिए उन्हें भारत सरकार से पद्मश्री और पद्म विभूषण जैसे सम्मान तो मिले ही, कई अन्य देशों ने भी उन्हें डॉक्टरेट की उपाधि से नवाजा. 14 साल पहले 31 अक्टूबर, 2005 के दिन उनका लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया.

इसके अलावा 31 अगस्त का दिन ब्रिटिश राजपरिवार से जुड़ी एक दुखद घटना के लिए भी याद किया जाता है. साल 1997 में आज ही के दिन राजकुमार चार्ल्स की पहली पत्नी डायना स्पेंसर की एक कार दुर्घटना में मौत हो गई थी. 1981 में ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के पुत्र से डायना स्पेंसर की शादी पूरी दुनिया के लिए बड़ी खबर थी. लेकिन डायना की असमय मौत उससे भी बड़ी खबर बनी. इसने दुनिया को स्तब्ध कर दिया और ब्रिटिश राजपरिवार को झकझोर कर रख दिया था.

देश-दुनिया के इतिहास में 31 अगस्त की तारीख में दर्ज कुछ अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं का सिलसिलेवार ब्यौरा इस प्रकार है:

1881 : अमेरिका में पहली टेनिस चैंपियनशिप का आयोजन.

1920 : अमेरिकी शहर डेट्रायट में रेडियो पर पहली बार समाचारों का प्रसारण.

1956 : राष्ट्रपति ने राज्य पुनर्गठन विधेयक को मंजूरी दी.

1957 : मलेशिया को ब्रिटेन से आजादी मिली.

1962 : कैरेबियाई देश टोबैगो एवं त्रिनिदाद ब्रिटेन से स्वतंत्र हुए.

1968 : भारत के टू-स्टेज राउंडिंग रॉकेट रोहिणी-एमएसवी 1 का सफल प्रक्षेपण.

1983 : भारत के उपग्रह इनसेट-1बी का अमेरिका के अंतरिक्ष शटल चैलेंजर से प्रक्षेपण.

1991 : उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान ने सोवियत संघ से स्वतंत्रता की घोषणा की.

1993 : रूस ने लिथुआनिया से अपने आखिरी सैनिकों को वापस बुलाया.

1995 : पहली बार एमनेस्टी इंटरनेशनल ने चीन में मानवाधिकार की स्थिति पर आपत्ति दर्ज की.

2005 : इराक की राजधानी बगदाद में धार्मिक अवसर पर फिदायीन हमले के भय से मची भगदड़ में 800 से ज्यादा लोग मारे गए.