1-लोकसभा चुनावों में लगे करारे झटके के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चर्चित चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की सेवाएं ली हैं. वे अपने काम में भी लग गए हैं. पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को सलाह दी गई है कि विपक्षी दलों की आलोचना करते समय वे नाप-तौल कर टिप्पणी करें और साथ ही हर मामले पर बोलने से बचें. इस कवायद की संभावनाओं को टटोलती बीबीसी पर प्रभाकर एम की रिपोर्ट.

ममता बनर्जी की छवि बदलने की कवायद कितनी कारगर

2-जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म हुए अब एक महीना होने वाला है. मोदी सरकार के इस ऐतिहासिक फैसले के तमाम पहलुओं पर बहस अब भी जारी है. न्यूजलॉन्ड्री पर प्रकाशित राहुल कोटियाल की यह रिपोर्ट बताती है कि अब आगे जम्मू-कश्मीर में मुख्यधारा की राजनीति का क्या होने वाला है.

‘तिरंगा उठाने वाले बचे-खुचे लोगों को भी अपना दुश्मन बना दिया भारत ने’

3-जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म किए जाने का विपक्ष विरोध कर रहा है. लेकिन सबको चौंकाते हुए बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती इस मामले पर केंद्र सरकार के समर्थन में खड़ी हैं. द प्रिंट हिंदी पर अंबरीश कुमार का लेख बताता है कि भाजपा को पानी पी पीकर कोसने वाली मायावती अगर ऐसा कर रही हैं तो यह अनायास नहीं है.

केंद्र सरकार की नीतियों का समर्थन क्यों कर रही हैं मायावती?

4-अर्थव्यवस्था को लेकर हर तरफ से नकारात्मक खबरें आ रही हैं और पहले नकार की मुद्रा में रहने के बाद अब सरकार इस संकट से निपटने के लिए एक के बाद एक कई नए ऐलान कर रही है. द वायर हिंदी पर अपने इस लेख में सिद्धार्थ भाटिया का मानना है कि जब लोग बिस्किट का एक पैकेट खरीदने से पहले भी सोचने लगें, तो एक गहरे आर्थिक संकट की दस्तक सुनना ज़रूरी हो जाता है.

रोजगार संकट: यह सरकार के लिए नींद से जागने का समय है

5-ब्राजील के मशहूर अमेजन के जंगलों की आग बीते दो हफ्तों से सुर्खियों में है. लेकिन इसके अलावा भी जंगल जल रहे हैं और इनमें हिमालय और अफ्रीका से लेकर अलास्का तक के जंगल शामिल हैं. 2019 के पहले आठ महीनों में दुनिया भर में जंगलों की आग के 1.6 करोड़ मामले सामने आए हैं. डॉयचे वैले पर एलेक्जेंडर फ्रॉयड की रिपोर्ट

सिर्फ अमेजन के जंगल ही नहीं जल रहे हैं!