दस जनपथ के अंदर सोनिया गांधी की बैठकें बढ़ने लगी हैं और राहुल गांधी के घर पर प्रियंका गांधी का आना-जाना बढ़ा है. राहुल गांधी फिलहाल वायनाड के सांसद तक ही अपनी भूमिका सीमित रखना चाहते हैं, लेकिन सोनिया गांधी कांग्रेस को ज़िंदा करने का फैसला कर चुकी हैं. उनके सामने जिस भी नेता ने कहना चाहा कि पार्टी में निराशा है, उसे सोनिया ने 1999 की हार का उदाहरण दिया.

दस जनपथ में बैठक के बाद एक पुराने कांग्रेसी नेता बताते हैं कि मैडम उतनी फिट नहीं हैं लेकिन दिमाग उसी अंदाज़ में चल रहा है. अब फैसला सिर्फ मैडम ही कर रही हैं. कांग्रेस के नेताओं की बात मानें तो सोनिया गांधी ने वही 1999 वाला फॉर्मूला 2019 में भी अपनाना शुरू किया है. देश में जहां-जहां कांग्रेस के नेता घर बैठे हुए हैं, पार्टी से अलग हो चुके हैं या फिर दुखी हैं उन्हें पार्टी में जगह मिलेगी. इसलिए दिल्ली की विधायक अलका लंबा से भी सीधे सोनिया की मुलाकात हो रही है. वरना एक विधायक से इस तरह की मुलाकात कांग्रेस संस्क़ृति का हिस्सा कहां रही है!

सोनिया गांधी एक-एक कर हर राज्य में पार्टी को मजबूत करना चाहती हैं. इसलिए दिल्ली, मध्य प्रदेश, पंजाब, छत्तीसगढ़, राजस्थान जैसे राज्यों के नेताओं से बैठक हो चुकी है. लेकिन असल मसला उत्तर प्रदेश का है. यहां अब फैसला यह हुआ है कि प्रियंका गांधी अकेले दम पर उत्तर प्रदेश संभालेंगी.

कांग्रेस के एक महत्वपूर्ण सूत्र बताते हैं कि पिछले दो महीने में प्रियंका गांधी और उनकी टीम ने उत्तर प्रदेश के अलग-अलग इलाकों के लगभग छह हजार से ज्यादा लोगों की बातें सुनी है. उन्होंने उत्तर प्रदेश के सभी मौजूदा विधायकों और पूर्व विधायकों से भी मुलाकात की है. इसके अलावा प्रियंका की टीम प्रखंड और गांव के स्तर तक कांग्रेस के पुराने और नए कार्यकर्ताओं के बीच भी पहुंची. इनमें से कइयों को दिल्ली लाया गया या फिर प्रियंका गांधी अपनी उत्तर प्रदेश यात्रा के दौरान इनसे मिलीं. पुराने सांसदों से भी उन्होंने बात की. फिर यह फैसला हुआ कि उनकी टीम में 40 से 50 साल के लोग होंगे और महिलाओं को प्रमुखता मिलेगी. सोनिया गांधी बाकी देश देखेंगी और प्रियंका फिलहाल सिर्फ उत्तर प्रदेश.

प्रियंका गांधी की नजर 2022 के विधानसभा चुनाव पर है जहां वे भाजपा का विकल्प बनना चाहती हैं. उनकी करीबी एक महिला नेता बताती हैं कि प्रियंका गांधी रिएलिटी समझने वाली नेता हैं. उन्होंने साफ कहा है कि अभी किसी को मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री बनने का सपना नहीं देखना चाहिए. अभी हमसे दिल्ली और लखनऊ दोनों बहुत दूर है. लेकिन हम इतना तो जरूर कर सकते हैं कि जनता में जाकर भरोसा दिला सकें कि भाजपा को कोई रोक सकता है तो वह कांग्रेस है. जब कांग्रेस के नेताओं ने प्रियंका के मुंह पर कह दिया कि ‘दीदी अगर अखिलेश या मायावती से समझौता करेंगे तो जनता हमें चार नंबर की ही पार्टी समझेगी’ तो इसका जवाब प्रियंका ने यह कहकर दिया कि जब तक उत्तर प्रदेश उनके हाथ में है कांग्रेस किसी भी पार्टी से समझौता नहीं करेगी.

इसके बाद कार्यकर्ताओं की एक और मांग थी कि प्रियंका गांधी को अब पूरा वक्त उत्तर प्रदेश में देना होगा. इस पर उन्होंने वादा किया कि एक महीने के अंदर नई टीम का ऐलान हो जाएगा फिर वे अपनी टीम के कहने पर चलेंगी. यह नई टीम उन्हें जहां बुलाएगी वे वहां मौजूद होंगी. पंचायत से लेकर प्रदेश स्तर तक के प्रदर्शन में वे शरीक हो सकती हैं.

इस प्रयोग का पहला इम्तिहान उत्तर प्रदेश विधानसभा के उपचुनाव में होने वाला है. प्रियंका गांधी ने अपनी पसंद के पांच उम्मीदवारों को टिकट दे दिया है. अकेले दम पर कांग्रेस विधानसभा की इन पांच सीटों पर चुनाव लड़ेगी. प्रियंका के एक करीबी नेता कहते हैं कि बहुत सोच-समझकर यह उपचुनाव लड़ा जाएगा इसलिए पांचों जगहों पर मजबूत उम्मीदवार उतारे गए हैं. प्रियंका गांधी खुद इन उपचुनावों की कमान संभालेंगी. पार्टी इनमें जीतने से ज्यादा नंबर दो बनने के लिए लड़ने वाली है. जिस दिन जनता को भरोसा हो गया कि उत्तर प्रदेश में प्रियंका गांधी की कांग्रेस योगी-मोदी और शाह की तिकड़ी को रोक सकती है उस दिन से कांग्रेस ज़िंदा हो जाएगी. इस बार मौका अच्छा है, सिर्फ पांच सीटें हैं. पांचों अलग-अलग क्षेत्रों में है इसलिए बाकी के जिले के कांग्रेस कार्यकर्ता भी यहां पहुंच सकते हैं. प्रियंका गांधी ने अभी थ्योरी में सबको समझा दिया है लेकिन इन उपचुनावों में प्रैक्टिकल टेस्ट होना है. जो कांग्रेस नेता दम लगाएगा, पार्टी को वक्त देगा वह प्रियंका की टीम में आगे चलेगा जो ऐसा नहीं करेगा टीम से बाहर हो जाएगा.

प्रियंका गांधी की टीम में काम करने वाले एक सूत्र बताते हैं कि उनकी शख्सियत एकदम अलग है. बैठकों के दौरान प्रियंका सबकी सुनती हैं, शुरू में टोकती तक नहीं हैं. जब सामने वाला अपनी बात खत्म कर लेता है तब अपनी तरफ से समझाती हैं, बातें सहज होती है लेकिन मतलब की होती हैं.

प्रियंका गांधी अब हवाबाजी पर लगाम लगाना चाहती हैं. इसलिए नेता बड़ा हो या छोटा सबको एक ही बात कही जा रही है - रिजल्ट आना चाहिए. जनता के बीच जाइए, आप माहौल बनाइए. मुद्दे बहुत हैं, जनता खुद उन मुद्दों पर सोच रही है. लेकिन कांग्रेस पार्टी कहीं दिखती नहीं है इसलिए जनता उसे वोट नहीं देती. सिर्फ प्रेस कांफ्रेंस करने और पार्टी दफ्तर चले जाने से पार्टी मजबूत नहीं होगी. मौका अच्छा है, उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा अभी शांत है. इसलिए कांग्रेस को अभी से मुखर और ताकतवर बनकर भाजपा का मुकाबला करना होगा.

प्रियंका गांधी का प्रयोग कितना सफल होता है इसी पर यह निर्भर करेगा कि कांग्रेस का भविष्य कैसा होगा. सोनिया गांधी ने अब करीब-करीब उन अटकलों को खारिज़ कर दिया है कि अगला कांग्रेस अध्यक्ष गांधी परिवार के बाहर से होगा. दस जनपथ में मिलने वाले नेता भी यही मांग कर रहे हैं कि पार्टी को 1996 की तरह नहीं 1999 की तरह चलाना होगा. यानी सोनिया के बाद उनके बेटे या बेटी में से किसी एक का अध्यक्ष बनना तय है. राहुल गांधी इसके लिए साफ-साफ मना कर चुके हैं और ज्यादातर कांग्रेसी भी 2024 में फिर से उन्हें मौका देना नहीं चाहते. इसलिए सोनिया के बाद प्रियंका लाओ की मुहीम जोर पकड़ रही है.

सूत्र बताते हैं कि प्रियंका गांधी ने कहा है कि वे पहले उत्तर प्रदेश में कुछ कर दिखाना चाहती हैं और उसके बाद ही आगे की राजनीति पर फैसला करेंगी. अगर उत्तर प्रदेश में वे 2022 में कामयाब हो गईं तो फिर 2024 में खुलकर आमने-सामने की लड़ाई लड़ेंगी.