पिछले दिनों स्कूल यूनिफॉर्म पहने, पीठ पर बस्ता टांगे सड़क पर एरियल फ्लिप करते दो बच्चों का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में रहा था. इस वीडियो ने मीडिया में भी सुर्खियां बटोरीं क्योंकि दुनिया की सर्वश्रेष्ठ एथलीट नादिया कोमनेच ने इसकी तारीफ करते हुए इसे रिट्वीट किया था. इसके अलावा केंद्रीय खेल मंत्री किरेन रिजिजु ने भी लोगों से अपील की थी कि अगर कोई इन बच्चों को उन तक पहुंचा दे तो वे इन्हें सही ट्रेनिंग दिलवाने का इंतजाम कर सकते हैं.

शुरूआत में बताया जा रहा था कि यह वीडियो दीमापुर, नागालैंड का है लेकिन जब मीडिया इन्हें खोजा तो पता चला है कि ये दोनों बच्चे कोलकाता की एक झोपड़पट्टी में रहते हैं. वीडियो में बेहद कमाल तरीके से गुलाटियां खाने वाले इन बच्चों में से एक 11 साल की जशिका खान यानी लवली है और दूसरा उसके साथ पढ़ने वाला 12 साल का मोहम्मद अजाजुद्दीन यानी अली है. इन्हें खोजे जाने के बाद इनके बैकग्राउंड के अलावा इनके बारे में मिली एक दिलचस्प जानकारी यह है कि ये बच्चे असल में हिप-हॉप डांसर हैं, जिमनास्ट नहीं और डांस के लिए ही इन्होंने कलाबाजियां खाना सीखा था. अब वीडियो वायरल होने के बाद इनके माता-पिता से लेकर शिक्षक, पड़ोसी और यहां तक कि मीडिया भी इन्हें जिम्नास्टिक्स की ट्रेनिंग दिलाने की कोशिश करते नज़र आ रहे हैं.

इस पूरे घटनाक्रम को गौर से देखें तो समझ में आता है कि हमारा समाज ‘खेलोगे-कूदोगे तो होगे खराब’ की मानसिकता से तो कुछ हद तक बाहर आ गया है लेकिन ‘नाचोगे-गाओगे तो क्या होगा,’ इसका जवाब शायद अब तक नहीं ढूंढ पाया है. शायद यही वजह है कि वायरल वीडियो में जिम्नास्ट नज़र आ रहे बच्चों के डांसर निकलने के बाद भी कोई यह कहता नहीं दिख रहा कि ‘तुममें खूबियां तो जिम्नास्टिक्स वाली भी हैं लेकिन फिर भी तुम चाहो तो डांसर ही बने रह सकते हो!’ जहां तक नादिया कोमनेच द्वारा तारीफ मिलने का सवाल है, उन्होंने जो और जितना दिखा उसकी तारीफ की थी. नादिया से तारीफ मिलना बेशक बहुत, बहुत बड़ी बात है, लेकिन इसका मतलब यह कैसे हो सकता है कि सिर्फ इसी वजह से दोनों बच्चों को जिम्नास्ट बन जाना चाहिए. और फिर यह भी तो नहीं पता कि नादिया ने उनकी जिमनास्टिक को ही ‘ऑसम’ बताया था या फिर उन्हें कई मिली-जुली वजहों से दोनों बच्चों का यह वीडियो अच्छा लगा था.

परिवार, समाज और देश के पूरे सहयोग के बाद भी इन बच्चों के जिम्नास्टिक बनने में जो पहली बाधा है, वह इनकी उम्र है. दरअसल जिम्नास्टिक्स के लिए बच्चों को बहुत कम, कई बार तो दो-तीन साल की उम्र से ही ट्रेनिंग देना शुरू कर दिया जाता है. इस कलात्मक खेल के जानकार भी पांच साल की उम्र को इसकी ट्रेनिंग की शुरूआत के लिए सही उम्र मानते हैं. हालांकि ऐसे उदाहरण भी मौजूद है जब एथलीटों ने दस-बारह साल या इससे ज्यादा की उम्र होने पर जिम्नास्टिक्स करना शुरू किया लेकिन उनके करियर की सफलता की दर बेहद कम रही है. देर से जिम्नास्टिक्स शुरू करने वाले ज्यादातर एथलीट इसमें कुशल तो हो जाते हैं लेकिन ओलंपिक या ऐसी किसी बड़ी अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा लेने तक नहीं पहुंच पाते हैं.

अली और लवली के डांस टीचर शेखर राव ने मीडिया से हुई बातचीत में बार-बार बताया है कि ये बच्चे कुछ ही समय से उनके पास डांस सीखने आ रहे थे. उन्होंने ही इन्हें फ्लिप करना सिखाया था जिसके बाद इन दोनों ने न सिर्फ उसकी प्रैक्टिस जारी रखी बल्कि अपनी तरफ से भी उसमें कुछ न कुछ जोड़ने की कोशिश करते रहे. यह बताता है कि ये बच्चे सीखने में काफी तेज और मेहनती हैं और डांस के लिए काफी जुनूनी भी. डांस के लिए इसलिए कि जब वे ये करतब करना सीख रहे थे तब उन्हें नहीं पता था कि इसके चलते एक दिन उनके पास जिम्नास्ट बनने का भी कोई विकल्प होगा.

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अगर अली और लवली के अलग-अलग वीडियोज में उनके बॉडी मूवमेंट्स को ध्यान से देखा जाए तो डांस या जिम्नास्ट की जानकारी रखने वाला कोई भी व्यक्ति बता सकता है कि वे जो कर रहे हैं वह फ्लेक्सिबिलिटी से ज्यादा ट्रिक्स और उनकी मेहनत का कमाल है. अगर इसे सीधे-सीधे शब्दों में कहें तो वायरल वीडियो में बच्चों द्वारा दिखाई गई कलाकारी, जिम्नास्टिक्स से ज्यादा उनकी नृत्य कुशलता का नज़ारा है. और यह नृत्य कुशलता शायद उनकी ही डांस संस्था में कई अन्य बच्चों के पास भी हो सकती है.

साक्षात्कारों के दौरान जब भी ये बच्चे जिम्नास्टिक्स के बारे में बात करते हैं तो उनकी देहभाषा यह बताती है कि यह शब्द उनके लिए उतना जाना-पहचाना नहीं है. साथ ही, इनके माता-पिता - जो डेली वेज मजदूर हैं - की बातों से भी अंदाजा लगता है कि वे अपने बच्चों के असली हुनर और उनकी इच्छाओं से बेखबर हैं और उनके लिए तय किए जा रहे भविष्य के बारे में भी ज्यादा कुछ नहीं समझते हैं. अलग-अलग जगहों पर कही गई उनकी बातों का कुल जमा मतलब यही निकलता है कि अगर खेलमंत्री, प्रशासन या चार जानकार लोग उनके बच्चों को एथलीट बनाने के लिए कह रहे हैं और इसके लिए मदद कर रहे हैं तो बच्चों को वही बनना चाहिए.

सत्याग्रह की सहयोगी वेबसाइट स्क्रोल से हुई बातचीत के दौरान लवली कहती है कि अगर उसे मौका मिला तो वह जिम्नास्टिक्स के साथ-साथ डांस भी करते रहना पसंद करेगी. ऐसा ही कुछ एक दूसरे इंटरव्यू में अली भी कहता है. फिलहाल इसका विकल्प उनके सामने है या नहीं, कह पाना मुश्किल है. ऐसा शायद तभी हो सकता था जब इन बच्चों के वायरल हुए वीडियो को नादिया कोमनेच के बजाय मडोना या शकीरा ने ट्वीट किया होता. तब उन्हें किरेन रिजिजू के बजाय बॉलीवुड के सबसे बड़े प्रोडक्शन हाउस और डांस डायरेक्टर ढूंढ़ते और उनके लिए अपने पसंदीदा करियर को चुन पाना थोड़ा आसान हो सकता था.