दिल्ली की एक अदालत ने एयरसेल-मैक्सिस केस में सीबीआई और ईडी द्वारा दर्ज मामलों में पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति को अग्रिम जमानत दे दी है. पीटीआई के मुताबिक इससे पहले दोनों जांच एजेंसियों ने अदालत से अपने आदेश को टालने का अनुरोध किया जिसे ठुकरा दिया गया. अदालत ने कहा कि मामला 2018 में दर्ज हो चुका है लेकिन दलील देने के बजाय ईडी आगे और जांच की जरूरत के बहाने तारीख पर तारीख मांग रहा है.

अदालत ने ईडी की जांच पर भी सवाल उठाए. उसके मुताबिक जांच एजेंसी द्वारा आगे और जांच के बहाने तारीख पर तारीख मांगना अपने आप में बहुत कुछ कहता है और इस पर कुछ और कहने की जरूरत नहीं है. अदालत का यह भी कहना था कि ईडी ने जांच में काफी समय लगा दिया है, जबकि लगभग समूची सामग्री शुरू से ही उसके पास है. अदालत ने पी चिदंबरम और कार्ति को जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया है.

एयरसेल-मैक्सिस मामला एयरसेल कंपनी में विदेशी निवेश की मंजूरी दिलाने से जुड़ा है. चिदंबरम पर आरोप है कि 2006 में वित्त मंत्री रहते हुए उन्होंने एयरसेल में 3,650 करोड़ रुपए के विदेशी निवेश को अवैध मंजूरी दिलाई. इसके बदले उन्हें और अन्य आरोपितों को कुल 1.16 करोड़ रुपए का अनुचित लाभ मिला. ईडी का यह भी आरोप है कि वित्त मंत्री के रूप में चिदंबरम केवल 600 करोड़ रुपए तक के निवेश को मंजूरी दे सकते थे. लेकिन उन्होंने इस नियम का उल्लंघन किया और ज्यादा बड़े निवेश को मंजूरी देने से पहले उसे विचार के लिए आर्थिक मामलों से जुड़ी कैबिनेट कमेटी के पास भी नहीं भेजा.