भारत सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि पेट्रोल या डीज़ल वाहनों को देश में बैन करने का सरकार का फिलहाल कोई इरादा नहीं है. गडकरी ने यह बात 5 सितंबर को सिआम (सोसायटी ऑफ इंडियन मैन्युफैक्चरर्स) की एनुअल कॉन्फ्रेंस में कही. सिआम की यह 59वी कॉन्फ्रेंस दिल्ली में आयोजित की गई थी. बीते कुछ दिनों से बाज़ार में इंटरनल कंबस्टन इंजन (जिसमें ईंधन के दहन से कई तरह की गैस पैदा होती हैं और पिस्टन पर दवाब बनाती हैं) को बंद करने की चर्चाएं जोरों पर थीं. 2030 तक पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहनों पर निर्भर होने जैसी ख़बरें भी इन चर्चाओं को हवा दे रही थीं. लेकिन गडकरी ने इस तरह की किसी भी संभावना को नकार दिया है.

हालांकि अपने बयान में नितिन गडकरी का कहना था कि सरकार के सामने कई चुनौतियां हैं. उन्होंने कहा, ‘हमारी सरकार रोजगार और निर्यात के क्षेत्र में भारतीय ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के योगदान से भलि-भांति परिचित है. लेकिन सरकार इस समय कुछ प्रमुख चुनौतियों से जूझ रही है, इनमें- आयात किए जाने वाले क्रूड ऑइल की कीमतें, प्रदूषण और सड़क सुरक्षा शीर्ष पर हैं. 4.50 लाख करोड़ मूल्य वाली ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को ऐसे ईंधन स्त्रोत की तरफ़ बढ़ना होगा जो कम प्रदूषण पैदा करे. लेकिन प्रदूषण के लिए सिर्फ़ वाहनों को जिम्मेदार ठहराना भी ठीक बात नहीं.’ इस मौके पर नितन गडकरी ने बैंकों की मौजूदा हालत को देखते हुए वाहन निर्माताओं को अपनी खुद की वित्तीय संस्थाएं विकसित करने की सलाह भी दी ताकि खरीददारों को लोन लेने में किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े.

इसके अलावा नितिन गडकरी ने हाइब्रिड वाहनों पर लगने वाली जीएसटी की दरों को इलेक्ट्रिक वाहनों के बराबर किए जाने की भी पैरवी भी की. दरअसल जुलाई-2019 में जीएसटी काउंसिल ने इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री को प्रोत्साहन देने के लिए इन पर लगने वाले टैक्स की दरों को 12 से घटाकर 5 फीसदी कर दिया था. उधर, एसयूवी की ही तरह हाइब्रिड वाहनों पर लगने वाले जीएसटी की दरें 30.3 प्रतिशत से बढ़ाकर 43 प्रतिशत कर दी गईं जिसके चलते इन वाहनों की कीमतों में जबरदस्त इज़ाफ़ा और बिक्री में कमी देखने को मिली. लेकिन अब नितिन गडकरी का कहना है कि हाइब्रिड वाहनों पर लगने वाली जीएसटी दर को घटाने की अनुशंसा वित्त मंत्रालय से की जा चुकी है.

हाइब्रिड वाहन वे होते हैं जिनमें इंजन के साथ बैटरी भी लगी होती है. अलग-अलग वाहन निर्माता कंपनियों ने अपने-अपने हाइब्रिड सिस्टम विकसित किए हुए हैं. यह सिस्टम सिग्नल जैसी जगहों पर इंजन के चालू, लेकिन कार के निष्क्रिय खड़ी रहने पर इंजन को पॉवर सप्लाई देता रहता है जिससे कार की माइलेज में इज़ाफ़ा देखने को मिलता है. इसके अलावा हाइब्रिड सिस्टम में लगी बैटरी इंजन को अतिरिक्त ताकत देने के साथ कार्बन डाई ऑक्साइड का उत्सर्जन घटाकर बड़ी मात्रा में प्रदूषण को भी कम करती है.

फॉक्सवैगन पोलो और वेंटो के फेसलिफ्ट वर्ज़न

फॉक्सवेगन इंडिया ने भारत में अपनी दो प्रमुख कारों- हैचबैक पोलो और सेडान वेंटो के फेसलिफ्ट वर्ज़न उतार दिए हैं. इन दोनों कारों को फ्रेश लुक देने के लिए फॉक्सवैगन ने इनमें कॉस्मेटिक बदलाव तो किए ही हैं साथ ही नए फीचर्स भी जोड़े हैं ताकि ये कारें बाज़ार में अपनी प्रतिस्पर्धी कारों से टक्कर ले सकें. इस बार कंपनी ने पोलो और फॉक्सवैगन दोनों ही कारों को नए सनसेट रेड कलर में भी उपलब्ध करवाया है.

यदि लुक्स की बात करें तो ये दोनों ही कारें कंपनी की जीटीआई रेंज से प्रभावित दिखती हैं. पोलो और वेंटो दोनों के साथ सिग्नेचर स्टाइल की ब्लैक हनीकॉम्ब मेश ग्रिल दी गई है. लेकिन पोलो फेसलिफ्ट की बात करें तो इसे प्रीमियम लुक देने के लिए कंपनी ने इसकी ग्रिल के नीचे की तरफ क्रोम स्ट्रिप दी है. इसके अलावा फॉक्सैवगन ने रिवाइज़्ड बंपर और ब्लैक्ड आउट हैडलैंप्स की मदद से अपनी इस हैचबैक को फ्रेश अपील देने की सफल कोशिश की है. पोलो के साथ दिए गए नए 10-स्पॉक अलॉय व्हील्स कंपनी की ही कॉम्पैक सेडान एमिओ की याद दिलाते हैं. कार के दरवाज़ों के नीचे ब्लैक साइड स्कर्ट दी गई है जो इसके बंपर तक जाती है और कार को स्पोर्टी फील देती है. पोलो फेसलिफ्ट का रियर लुक भी पहले से नया नज़र आता है. यह कहने की प्रमुख वजह बनती है 3-डी इफेक्ट वाली नई डिज़ाइन की टेललाइट. इसके अलावा पोलो-2019 के साथ दी गई नई ब्लैक फिनिश्ड रूफ स्पॉइलर भी कार के नए होने की गवाही देती है.

यदि अपडेटेड वेंटो की बात करें तो इस कार में भी तकरीबन पोलो वाले ही बदलाव देखने को मिलते हैं. अन्य बदलावों में कार के साथ दिए गए नई स्टाइल के फुल एलईडी हैडलैंप्स (टॉप स्पैक) और प्रोजेक्टर हैडलैंप्स (लोअर स्पैक), मेशग्रिल से मैच करते हुए नए एयरडैम, नए डिज़ाइन का बंपर और मल्टीस्पकॉक अलॉय व्हील्स शामिल हैं.

अंदर से झांकने पर नई पोलो और वेंटो का डैशबोर्ड इन कारों के पुराने मॉडल की ही याद दिलाता है, लेकिन कनेक्टिविटी के मामले में कंपनी ने कारों के साथ अपना फॉक्सवैगन कनेक्ट फीचर उपलब्ध करवाया है. यह कनेक्टिविटी सिस्टम डोंगल बेस्ड यूनिट के साथ आता है जिसे आपके स्मार्टफोन के साथ जोड़ने के अलावा किसी दूसरी फॉक्सवैगन कार के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके अलावा पोलो के साथ, एंड्रॉइड ऑटो और एप्पल कार प्ले सपोर्टेबल टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम कूल्ड ग्लवबॉक्स, क्रूज़ कंट्रोल, हाइट एडजस्टेबल ड्राइवर सीट और ऑटोमेटिक क्लाइमेट कंट्रोल जैसे फीचर्स मिलते हैं. वहीं, वेंटो के साथ इन सभी ख़ूबियों के अलावा ऑटो लेवलिंग हैडलैंप्स भी मिलते हैं.

सुरक्षा के लिहाज से फॉक्सवैगन ने दोनों गाड़ियों को डुअल एयरबैग्स, एंटीलॉक ब्रेकिंग सिस्टम (एबीएस), इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी प्रोग्राम (ईएसपी), ऑटो डिमिंग आईआरवीएम, 3-पॉइंट सीटबेल्ट सेटअप और फ्रंट फॉगलैंप्स से लैस किया है. पोलो की तुलना में वेंटो के साथ अतिरिक्त तौर पर फ्रंट साइड एयरबैग्स और हिल होल्ड असिस्ट जैसे फीचर मिलते हैं. इनके अलावा फॉक्सवैगन अपनी दूसरी डीज़ल गाड़ियों की तरह पोलो और वेंटो के डीज़ल ट्रिम के साथ 5-साल की स्टैंडर्ड वारंटी और पेट्रोल ट्रिम के साथ 4-साल की स्टैंडर्ड वारंटी दे रही है. इसे सात साल के लिए बढ़वाया जा सकता है.

परफॉर्मेंस के मामले में पोलो स्टैंडर्ड के साथ पुराने वाले पेट्रोल और डीज़ल इंजन दिए गए हैं. इनमें से 1.0 क्षमता का एमपीआई पेट्रोल मोटर 76 पीएस पॉवर के साथ 95 एनएम का टॉर्क पैदा करता है. वहीं 1.5 लीटर क्षमता का डीज़ल वेरिएंट 96 पीएस की पॉवर और 230 एनएम टॉर्क पैदा कर सकता है. ये दोनों ही इंजन 5-स्पीड मैनुअल ट्रांसमिशन गियरबॉक्स से जुड़े हैं. यदि कार के जीटी ट्रिम की बात करें तो इसके पेट्रोल ट्रिम में 4 सिलेंडर वाला 1.2 लीटर टीएसआई टर्बो इंजन मिलता है जो 104 पीएस पॉवर के साथ 175 एनएम का टॉर्क पैदा कर सकता है. वहीं कार के डीज़ल वेरिएंट में 1.5 लीटर टीडीआई इंजन मिलता है जो 110 पीएस पॉवर के साथ 250 एनएम का टॉर्क पैदा करने में सक्षम है.

यदि वेंटो की बात करें यह कार भी पहले की तरह पेट्रोल और डीज़ल दोनों ट्रिम में उपलब्ध है. इनमें से 1.6 लीटर क्षमता की एमपीआई पेट्रोल मोटर 105 पीएस/153 एनएम पॉवर पैदा करती है तो पोलो वाला 1.2 लीटर का टीएसआई पेट्रोल इंजन 104 पीएस/175 एनएम पैदा करता है. यदि डीज़ल इंजन की बात करें तो यह पोलो जीटी वेरिएंट वाला ही है. दोनों कारों के साथ 5-स्पीड मैनुअल ट्रांसमिशन बॉक्स स्टैंडर्ड तौर पर आता है. वहीं वेंटो के 1.2 लीटर पेट्रोल और 1.5 लीटर डीज़ल वेरिएंट और पोलो जीटी पेट्रोल ट्रिम के साथ 7-स्पीड डीएसजी ऑटोमेटिक गियरबॉक्स भी मिलता है.

यदि आप इन कारों का घर लाने का मन बना रहे हैं तो आपको पोलो स्टैंडर्ड के अलग-अलग वेरिएंट के लिए 5.82 से लेकर 9.31 लाख रुपए, पोलो जीटी लाइन के लिए 9.76 से लेकर 9.88 लाख रुपए, वेंटो स्टैंडर्ड के लिए 8.76 से लेकर 14.49 लाख और वेंटो जीटी लाइन के लिए 14.49 लाख रुपए कीमत चुकानी होगी. बाज़ार में पोलो का मुकाबला मारुति-सुज़ुकी बलेनो और ह्युंडई अलाइट आई-20 जैसी कारों से होगा तो वेंटो को टक्कर देने के लिए ह्युंडई वर्ना, होंडा सिटी और मारुति-सुज़ुकी सियाज़ जैसी कारें मौजूद हैं.

मारुति की फैक्ट्रियां दो दिन बंद

देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुज़ुकी ने हरियाणा में गुरुग्राम और मानेसर के अपने दोनों कारखानों में सात और नौ सितंबर को काम बंद रखने का फैसला लिया है. कंपनी ने इन दोनों तारीखों को उत्पादन शून्य दिवस घोषित किया. गौरतलब है कि भारतीय ऑटोमोबाइल क्षेत्र इन दिनों दो दशक की सबसे बड़ी मंदी का सामना कर रहा है. इसके चलते कई कंपनियों को अपना उत्पादन घटाना पड़ा है. बीते दिनों खबरें आई थीं कि इस मंदी ने अप्रैल से अब तक साढ़े तीन लाख से भी ज्यादा रोजगार छीन लिए हैं.

बाजार में नरमी के कारण मारुति ने बीते महीने यानी अगस्त में उत्पादन 33.99 प्रतिशत घटा दिया था. यह लगातार सातवां महीना है जब कंपनी ने ऐसा किया. अगस्त में मारुति सुजुकी इंडिया का उत्पादन 1,11,370 इकाई रहा. पिछले साल इसी माह यह संख्या 1,68,725 इकाई थी. भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल बाजार है. देश की जीडीपी में इस सेक्टर का योगदान साढ़े सात फीसदी के आसपास है. साढ़े तीन करोड़ से भी ज्यादा लोगों का रोजगार इससे जुड़ा है. यही वजह है कि आर्थिक जानकार इसकी सुस्ती को लेकर आगाह कर रहे हैं. उधर, इस क्षेत्र में सक्रिय कंपनियों की मांग है कि सरकार सुस्ती की समस्या से निपटने के लिए कुछ प्रोत्साहन उपायों का ऐलान करे.

बाज़ार में किआ सेल्टॉस का कमाल

दक्षिण कोरियाई कंपनी किआ मोटर्स की एसयूवी सेल्टॉस को भारतीय बाज़ार में जबरदस्त प्रतिक्रिया मिल रही है. लॉन्च होने के एक महीने के अंदर इस कार की 6236 यूनिट बेची जा चुकी हैं और बुकिंग 50 हजार का आंकड़ा पार कर चुकी है. इस तरह किआ सेल्टॉस ने सेगमेंट के कई दिग्गजों को बिक्री के मामले में पीछे छोड़ दिया है. हालांकि बीते कुछ सालों के दौरान भारतीय बाज़ार में नई कारों को शानदार रेसपॉन्स मिलने का ट्रेंड स्थापित सा हो गया है और बाद में इन कारों की बिक्री स्थिर हो जाती है. लेकिन सेल्टॉस को मिल रही प्रतिक्रिया को देखते हुए जानकारों का कहना है कि यह कार इतनी आसानी से अपनी लीड छोड़ने वाली कार नहीं दिखती. हाल ही में लॉन्च हुई सेगमेंट की अन्य प्रमुख गाड़ियों की बात करें तो एमजी हेक्टर के दो मॉडल में से सिर्फ़ एक 2000 यूनिट का आंकड़ा पार कर पाया है. इसके अलावा टाटा हैरियर की सिर्फ़ 635 यूनिट, रेनो कैप्चर की 32 यूनिट और निसान किक्स की सिर्फ़ 172 यूनिट बिक पाईं.