अमेरिका और तालिबान के बीच बातचीत के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं. अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने संकेत दिए हैं कि तालिबानी नेताओं के साथ बातचीत दोबारा हो सकती है. एक साक्षात्कार में उनका कहना था, ‘मैं निराशावादी नहीं हूं. मैंने तालिबान को वह कहते और करते देखा है जिसकी पहले उससे उम्मीद नहीं की जा सकती थी.’ माइक पॉम्पियो ने आगे कहा, ‘मैं उम्मीद करता हूं कि इस मामले पर तालिबान अपने बर्ताव में बदलाव लाएगा और उन बातों पर दोबारा प्रतिबद्धता जताएगा जिन पर हम कई महीनों से बात कर रहे थे.’

अमेरिका के विदेश मंत्री का यह बयान अफगानिस्तान में शांति और स्थायित्व के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा तालिबानी नेताओं के साथ होने वाली गोपनीय बैठक रद्द किए जाने के बाद आया है. डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को कहा था कि यह फैसला काबुल में पिछले हफ्ते हुए बम धमाके के बाद उठाया गया है जिसमें एक अमेरिकी सैनिक सहित 12 लोग मारे गए थे. डोनाल्ड ट्रंप के मुताबिक तालिबान के लगातार हिंसात्मक कृत्यों ने उसे विश्वास न करने योग्य बना दिया है.

उधर, तालिबान ने अफगान शांति वार्ता से पीछे हटने के डोनाल्ड ट्रंप के फैसले की आलोचना की है. एक बयान जारी कर उसने कहा है कि इससे ज़्यादा नुकसान अमेरिका को ही होगा. उसके मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति का यह फैसला परिपक्वता और अनुभव की कमी को दर्शाता है. डोनाल्ड ट्रंप की तालिबान और अफगान सरकार के प्रतिनिधियों से अलग-अलग मुलाक़ात होनी थी. इसकी वजह यह है कि तालिबान अफगान सरकार को अमेरिका की कठपुतली बताता है और उससे सीधे बात करने से इनकार करता है.