पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद पर उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली छात्रा ने अब उन पर बलात्कार का आरोप लगाया है. उसका कहना है कि चिन्मयानंद पिछले एक साल से उसका शारीरिक शोषण कर रहे थे. छात्रा ने उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा इस मामले में मुकदमा नहीं दर्ज किये जाने का भी दावा किया है.

पीटीआई के मुताबिक सोमवार को छात्रा ने मीडिया के सामने आकर ये आरोप लगाये हैं. उसका कहना है कि उसने एसआईटी को बताया था कि स्वामी चिन्मयानंद ने उसके साथ बलात्कार और एक वर्ष तक उसका शारीरिक शोषण किया. छात्रा के मुताबिक यह रिपोर्ट दिल्ली के लोधी रोड थाने में जीरो क्राइम नंबर पर दर्ज करके शाहजहांपुर भेज दी गई है, मगर स्थानीय पुलिस बलात्कार और शारीरिक शोषण की रिपोर्ट दर्ज नहीं कर रही है.

पीड़िता ने आगे कहा कि जांच दल को सारी बातें बताने के बाद भी चिन्मयानंद को गिरफ्तार नहीं किया गया है. उसके मुताबिक इससे पहले जब उसके पिता ने चिन्मयानंद के खिलाफ शारीरिक शोषण के आरोप में मुकदमे की तहरीर दी थी, तब शाहजहांपुर के जिलाधिकारी इंद्र विक्रम सिंह ने उसके पिता को धमकी देते हुए चिन्मयानंद के रसूख का हवाला दिया था. तब उन्होंने पुलिस से गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करने के लिए कहा था.

छात्रा ने आगे कहा कि उसके पास सारे साक्ष्य मौजूद हैं. वह कॉलेज हॉस्टल के जिस कमरे में रहती थी उसे सील कर दिया गया है, उसे मीडिया के सामने खोला जाए. सही समय आने पर साक्ष्य (वीडियो क्लिप) भी पेश किया जाएगा.

स्वामी चिन्मयानंद के अधिवक्ता ओम सिंह की ओर से दर्ज कराए गए पांच करोड़ रुपए की रंगदारी मांगे जाने के मामले में कथित पीड़िता ने कहा कि इसकी जांच होनी चाहिए. चिन्मयानंद ने जो आरोप लगाया है वह फर्जी है. एक सवाल के जवाब में छात्रा ने बताया कि उसके साथ दिल्ली के होटल में देखा गया संजय सिंह नामक युवक उसका भाई है.

पिछले दिनों भाजपा नेता स्वामी चिन्मयानंद के लॉ कॉलेज में पढ़ने वाली इस छात्रा ने उन पर यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगाया था. फेसबुक लाइव वीडियो में आरोप लगाने के बाद वह लापता हो गई थी. इस मामले में कुछ वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट से स्वत: संज्ञान लेने का अनुरोध किया था. उन्होंने कहा था कि आरोप लगाने वाली छात्रा तीन दिनों से गायब है लिहाजा सुप्रीम कोर्ट दखल दे. सुप्रीम कोर्ट ने मामले में संज्ञान लिया था. सात दिन बाद छात्रा राजस्थान के टोंक में मिली जिसके बाद उसे बीते शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर न्यायाधीशों के समक्ष पेश किया गया. उच्चतम न्यायालय के आदेश पर राज्य सरकार ने मामले की पड़ताल के लिये विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है, जो मामले की तफ्तीश कर रहा है.