झारखंड में तबरेज अंसारी नाम के एक मुस्लिम युवक की मॉब लिंचिंग (भीड हत्या) मामले में सभी 13 आरोपियों के खिलाफ हत्या का आरोप हटा दिया गया है. झारखंड पुलिस ने मंगलवार को यह जानकारी दी.

झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिला के पुलिस अधीक्षक कार्तिक एस ने पीटीआई को बताया, ‘हमने संबद्ध अधिकारियों की राय लेने के बाद आईपीसी की धारा 302 (हत्या) को 304 (गैर इरादतन हत्या) में तब्दील कर दिया है क्योंकि अधिकारी तबरेज अंसारी की लिंचिंग (भीड़ हत्या) के चलते मौत होने के बारे में किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंच पाए थे.’ पुलिस ने बताया कि तबरेज को चोटों के चलते उसकी तबियत बिगड़ने पर उसे सदर अस्पताल ले जाया गया. बाद में उसे जमशेदपुर के टाटा हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां उसे 22 जून को मृत घोषित कर दिया गया. चिकित्सकों ने शुरूआत में कहा था कि तबरेज की मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई है.

पुलिस के मुताबिक, ऐसे में भीड़ द्वारा पिटाई से तबरेज की मौत हुई या बाद में किसी अन्य कारण से इस बारे में साफ निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सका. पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार किये गए 13 लोगों में से दो लोगों के खिलाफ आरोपपत्र एक स्थानीय अदालत में दाखिल किया गया है और जल्द ही 11 आरोपियों के खिलाफ जांच पूरी की जाएगी. धारा 302 के तहत मौत की सजा या उम्र कैद और जुर्माना का प्रावधान है, वहीं धारा 304 के तहत उम्र कैद या 10 साल की कैद या जुर्माना या दोनों का प्रावधान है.

17 जून की रात तबरेज अंसारी और दो अन्य लोगों पर एक गांव में एक मकान में चोरी के इरादे से घुसने का आरोप लगाया गया था. इसके बाद ग्रामीणों ने तबरेज को पकड़ लिया तथा उसकी पिटाई की थी. सोशल मीडिया पर आए इस घटना के वीडियो में दिख रहा था कि तबरेज अंसारी की पिटाई एक खंभे से बांधकर की गई थी. उस पर हमला करने वाले लोग जय श्रीराम के नारे लगा रहे थे.इस घटना को लेकर देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन हुए थे. घटना की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया और कर्तव्य में लापरवाही बरतने को लेकर दो पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया था.