कहते हैं अंतरिक्ष में पेन से लिखना नामुमकिन होने का पता चलने पर उसकी बजाय पेंसिल के इस्तेमाल का आइडिया किसी बच्चे ने सुझाया था. कहने का मतलब है कि कई बार कोई बड़ी और जरूरी लगने वाली बात ऐसे लोग भी कर जाते हैं, जिनसे हमें इसकी जरा भी उम्मीद नहीं होती है. बड़े-बड़े अर्थशास्त्रियों को आइना दिखाने वाला ऐसा ही एक उदाहरण इस वीडियो में नजर आ रहे सरदार जी का है. ये कौन हैं, क्या हैं, क्या करते हैं, कहां रहते हैं, इस बारे में कोई जानकारी अब तक सामने नहीं आई है लेकिन एक आम नागरिक की आवाज कैसी होनी चाहिए, इसकी मिसाल जरूर बन गए हैं. पिछले कई दिनों से उनका यह वीडियो व्हाट्सएप पर खूब फॉरवर्ड किया जा रहा था और अब यह फेसबुक और ट्विटर पर भी तैरता दिखाई देने लगा है.

वीडियो में सरदार जी हाल ही सख्त हुए ट्रैफिक नियमों और भारी जुर्माने पर सवाल उठाते दिखते हैं. इसके बहाने वे डिजिटल इंडिया पर करारा तंज करते हुए कहते हैं कि ‘वैसे तो भारत चांद पर पहुंच गया लेकिन सड़क पर जाओ तो पूछते हैं कि आरसी कहां है? आरसी नहीं होगी तो चालान होगा. इसके लिए वे आधार का इस्तेमाल क्यों नहीं करते हैं जिसमें बस अंगूठा लगाने भर से सारे दस्तावेज उनके सामने खुल जाएं.’ वे पूछते हैं कि जब सबकुछ ‘हाईटेक’ तरीके से करना मुमकिन है तो फिर सरकार ऐसा क्यों नहीं कर पा रही है. सरदार जी वीडियो में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का जिक्र करते हैं, इससे अंदाजा लगता है कि हो सकता है वे हरियाणा के रहने वाले हों. इसके बाद वे खट्टर और केंद्र सरकार को भी वे जमकर निशाना बनाते हैं और सरकारी खजाने का हाल भी बड़े मजेदार अंदाज में पूछते हैं. हो सकता है, इस वीडियो को बहुत से लोगों ने सिर्फ इसलिए देखा हो क्योंकि सरदार जी बड़े मजेदार ढंग से, बहुत मासूमियत के साथ पंजाबी भाषा और अंदाज में बातें कर रहे हैं. लेकिन यह वीडियो इसलिए भी देखा जाना चाहिए वे जरूरी सवाल क्या हैं जिन्हें इस समय पूछे जाने की सख्त जरूरत है.

यह वीडियो इसलिए भी दिल खुश करता है क्योंकि एक लंबे वक्त बाद किसी आम आदमी का ऐसा वीडियो सामने आया है जिसमें वह किसी का गुणगान या विरोध करने की बजाय अपने मतलब की बात पूछता दिखाई दे रहा है. वह सवाल कर रहा है कि हमारे स्कूलों, अस्पतालों और उद्योंगो की इतनी बुरी हालत क्यों है या ऐसा क्यों है कि एक भी सरकारी विभाग फायदे में नहीं चल रहा है. ये सब, वे सवाल हैं जिन्हें पूछे जाने की जिम्मेदारी मीडिया को दी गई थी लेकिन उसे इसे ठीक से नहीं निभाया. इसके साथ ही ये वे सवाल भी हैं जिन्हें हर वोट देने वाले, टैक्स भरने वाले और सबसे जरूरी देश से प्रेम करने वाले नागरिक को जरूर और बार-बार पूछना चाहिए.