नए ट्रैफिक नियमों के तहत भारी जुर्माने पर बहस के बीच कई राज्यों ने इस मुद्दे पर अपनी-अपनी राह चलने का फैसला किया है. गुजरात और उत्तराखंड सरकार ने इस जुर्माने को आधा कर दिया है, जबकि उत्तर प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली भी कुछ ऐसा ही करने की तैयारी में है. उधर, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ऐलान किया है कि वे नए नियमों को अपने यहां लागू नहीं करेंगी.

दूसरी तरफ, केंद्रीय सड़क और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने इन राज्यों को नसीहत दी है. एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा, ‘हमने जुर्माने की रक़म इसलिए बढ़ाई कि लोग नियमों का पालन करें और हादसे कम हों ताकि लोगों की जान बच सकें. हमारा मकसद हादसे कम करना है. इसमें मुझे राज्य सरकारों के सहयोग की जरूरत है.’

नितिन गडकरी ने कहा, ‘यह कोई राजस्व इकट्ठा करने की योजना नहीं है. क्या आपको डेढ़ लाख लोगों की मौत की चिंता नहीं है? अगर राज्य सरकारें जुर्माने की रकम को घटाना चाहती हैं तो ठीक है, लेकिन क्या यह सच नहीं कि लोग न तो क़ानून मानते हैं और न ही इससे डरते हैं.’

सड़क दुर्घटनाओं की वजह से दुनिया में सबसे अधिक लोग भारत में मरते हैं. इनमें 65 फ़ीसदी लोग 18 से 35 आयुवर्ग के हैं. नितिन गडकरी का कहना था, ‘30 फ़ीसदी लाइसेंस बोगस हैं. लोग लाइसेंस नहीं लेते. सुनते नहीं. क़ानून के प्रति डर नहीं और सम्मान भी नहीं है. अब तक 100 रुपये का जुर्माना था जो लोग आसानी से भर देते थे और दोबारा ऐसी ग़लती करने से नहीं कतराते थे.’