मुसलमानों की शीर्ष संस्था जमीयत उलेमा-ए-हिंद (जेयूएच) ने कहा है कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और घाटी में रहने वाले लोगों का कल्याण भारत के साथ एकीकरण में है. पीटीआई के मुताबिक जमीयत ने गुरुवार को अपनी सालाना बैठक में एक प्रस्ताव पारित कर यह बात कही. इसमें पाकिस्तान पर हमला बोलते हुए कहा गया कि विध्वंसकारी ताकतें और ‘पड़ोसी मुल्क’ लोगों का इस्तेमाल करके कश्मीर को तबाह करने पर तुले हुए हैं.

जमीयत ने साफ कहा कि वह किसी अलगाववादी गतिविधि का कभी समर्थन नहीं कर सकता. अपने प्रस्ताव में उसका कहना था, ‘इस प्रकार की गतिविधियां न केवल भारत के लिए बल्कि कश्मीर की जनता के लिए भी हानिकारक हैं.’ संगठन ने हालांकि यह भी कहा कि वह कश्मीर के लोगों की इच्छाओं, उनके आत्मसम्मान और अपनी सांस्कृतिक पहचान को बचाए रखने की उनकी मांग से अनजान नहीं है.

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने कुछ दिन पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत से मुलाकात की थी. इस दौरान दोनों के बीच हिंदू-मुस्लिम एकता को बढ़ावा देने और भीड़ द्वारा हत्या की घटनाओं (मॉब लिंचिंग) सहित कई मुद्दों पर बातचीत हुई थी.