अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था के बढ़ने की दर अनुमान से काफी कम है. हालांकि, संस्था का यह भी कहना है कि इसके बावजूद भारत, चीन से कहीं आगे रहते हुए दुनिया की सबसे तेजी से विकास करने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहेगा.

आईएमएफ के प्रवक्ता गैरी राइस ने कहा, ‘जीडीपी के ताजा आंकड़े भारत की विकास दर में सुस्ती को दिखाते हैं. आईएमएफ का आकलन क्या है? हमारे पास नए आंकड़े आएंगे, लेकिन कॉरपोरेट और पर्यावरणीय नियामक की अनिश्चितता और कुछ गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफ़सी) की कमजोरियों के कारण भारत में हालिया आर्थिक वृद्धि उम्मीद से काफी कमजोर है.’

इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में देश की विकास दर पांच फीसदी रही है. यह बीते सात सालों में इसका सबसे निचला स्तर है. बीते साल इसी दौरान विकास दर 8 फ़ीसदी थी. आईएमएफ के मुताबिक इसकी वजह घरेलू मांग में आ रही कमी है.

आईएमएफ का आकलन ऐसे वक्त में आया है जब मोदी सरकार अर्थव्यवस्था की सुस्ती को लेकर विपक्ष के निशाने पर है. कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि यह सरकार की नीतियों का नतीजा है. पार्टी नेता और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इसके लिए नोटबंदी और जीएसटी जैसे फैसलों को जिम्मेदार बता चुके हैं. उधर, सरकार का कहना है कि इसके लिए वैश्विक कारक जिम्मेदार हैं.