कुछ समय पहले तक दिल्ली में आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच हमेशा की तरह तीखी बयानबाजी का दौर चल रहा था. दोनों दलों के नेता एक-दूसरे के बारे में काफी भला-बुरा कह रहे थे. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल हर बात के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जिम्मेदार ठहराते दिखते थे. वहीं दिल्ली भाजपा के छोटे-बड़े कई नेता भी केजरीवाल पर निजी हमले करने तक से बाज नहीं आ रहे थे.

लेकिन अब जब विधानसभा चुनावों में कुछ ही महीने का वक्त बचा है तो दोनों दलों के सुर बदल से गए लगते हैं. अरविंद केजरीवाल आजकल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आक्रामक बयान नहीं दे रहे हैं. इसकी बजाय आम आदमी पार्टी अब मोदी सरकार पर हमला करने के लिए सधी हुई प्रतिक्रियाओं का सहारा ले रही है.

इस बारे में आम आदमी पार्टी से जुड़े एक नेता कहते हैं, ‘पार्टी से बाहर जो लोग आप और अरविंद केजरीवाल के शुभचिंतक हैं, उन लोगों ने केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के साथ-साथ पार्टी के सभी बड़े नेताओं को लगातार यह नसीहत दी कि बेवजह हर बात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला करने से जनता के बीच आप को लेकर एक नकारात्मक छवि बन रही है. लोगों को लग रहा है कि केजरीवाल अपना काम कर नहीं रहे हैं और अपने बचाव में प्रधानमंत्री पर हमला बोल रहे हैं. भाजपा विरोधी पार्टियों के कुछ मुख्यमंत्रियों ने भी अरविंद केजरीवाल को नरेंद्र मोदी और भाजपा पर बेवजह हमला करने से बचने की सलाह दी है. इन सबका असर अब आपको न सिर्फ पार्टी के बयानों ​बल्कि अरविंद केजरीवाल की बातों में भी दिख रहा होगा.’

आम आदमी पार्टी के रुख में आए इस बदलाव से भारतीय जनता पार्टी भी अपनी रणनीति बदलने लगी है. दिल्ली के चुनाव प्रभारी बनाए गए प्रकाश जावड़ेकर ने पिछले दिनों दिल्ली प्रदेश भाजपा के पदाधिकारियों की जो बैठक ली थी, उसमें उन्होंने प्रदेश के नेताओं को यह निर्देश भी दिया है कि आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल के खिलाफ तीखे बयान नहीं देने हैं. जावड़ेकर ने उनसे कहा है कि केजरीवाल सरकार की आलोचना के लिए तथ्यों और तर्कों का सहारा लेना है.

इस बारे में दिल्ली प्रदेश भाजपा के एक नेता सत्याग्रह को बताते हैं, ‘पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व यह भांप गया है कि आप ने अपनी रणनीति बदल ली है. अब वह उस स्तर पर जाकर भाजपा की आलोचना नहीं कर रही है जिस स्तर पर जाकर पहले किया करती थी. ऐसे में अगर भाजपा की ओर से बेवजह हमला जारी रहा तो इसका लाभ विधानसभा चुनावों में आप को मिल सकता है. इस वजह से केंद्रीय नेतृत्व ने प्रकाश जावड़ेकर के जरिए प्रदेश के नेताओं को यह निर्देश दिया है कि बेवजह आलोचना से बचना है लेकिन तार्किक आलोचना का कोई अवसर नहीं गंवाना है.’

पिछले कुछ दिनों में दिल्ली सरकार ने कई लोक-लुभावन घोषणाएं भी की हैं. उसने हाल ही में डीटीसी में महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा की शुरुआत की है. साथ ही बिजली और पानी के बिलों में भी कई तरह की रियायतों की घोषणा केजरीवाल सरकार ने की है. सब्सिडी वाली इन योजनाओं की प्रदेश भाजपा के कुछ नेताओं ने तीखी आलोचना कर दी थी. लेकिन अब भाजपा के केंद्रीय नेताओं को लग रहा है कि इन घोषणाओं से आम लोगों को सीधा फायदा होगा और ऐसे में अगर भाजपा इनका विरोध करती हुई दिखेगी तो लोग उससे नाराज हो सकते हैं. भाजपा का यह भी आकलन है कि दिल्ली के आम लोगों को केजरीवाल सरकार की पहले की सब्सिडी योजनाओं से भी लाभ हुआ है. इसलिए इन योजनाओं का विरोध राजनीतिक तौर पर सही नहीं होगा. यह भी एक वजह है कि प्रकाश जावड़ेकर ने प्रदेश भाजपा के नेताओं को सिर्फ तर्क के साथ आलोचना करने की नसीहत दी है.

‘भाजपा के शीर्ष नेताओं को यह लगता है कि आम लोगों को सीधा लाभ पहुंचाने वाली योजनाओं का क्रियान्वयन जिस तरह से केंद्र की मोदी सरकार ने किया है, उसी तरह की कोशिश दिल्ली की केजरीवाल सरकार कर रही है. केंद्र की उज्जवला योजना से लेकर किसान मान धन योजना तक से आम लोगों को सीधा लाभ मिला है. इसी तरह से केजरीवाल सरकार की कई योजनाओं से भी लोगों को सीधा लाभ मिल रहा है. पार्टी को लगता है कि इन योजनाओं की आलोचना करने से आम लोगों में उसका मजाक बनेगा और चुनावों में इसका राजनीतिक नुकसान भी होगा’ प्रदेश भाजपा के नेता सत्याग्रह से कहते हैं,

हालांकि, दोनों राजनीतिक दलों के बीच चल रही जुबानी जंग के बीच बयानों का यह संघर्ष विराम कब तक चलेगा, इसके बारे में दोनों पार्टियों में कई तरह के संदेह व्यक्त किए जा रहे हैं. दोनों दलों के नेताओं को लग रहा है कि जैसे-जैसे विधानसभा चुनावों के दिन नजदीक आएंगे, वैसे-वैसे यह संघर्ष विराम कमजोर पड़ता जाएगा और दोनों दल फिर से अपने पुराने रंग में आकर एक-दूसरे के खिलाफ जहर उगलने का काम शुरू कर देंगे.

इस बारे में प्रदेश भाजपा के एक पदाधिकारी कहते हैं, ‘केजरीवाल की पूरी राजनीति तीखी आलोचना की बुनियादी पर ही खड़ी हुई है. कांग्रेस सरकार की आलोचना करके आम आदमी पार्टी को खड़ा करने का काम अरविंद केजरीवाल ने किया. जो आरोप वे लगाते थे, सरकार में आने के बाद उन पर चुप्पी मारकर बैठ गए. अरुण जेटली और नितिन गडकरी जैसे नेताओं पर उन्होंने बेबुनियाद आरोप लगाए. जब ये मामले अदालत में पहुंचे तो उन्होंने भाजपा के दोनों नेताओं से माफी भी मांग ली. इसलिए ये कहना मुश्किल है कि अरविंद केजरीवाल कब तक तार्किक आलोचना के रास्ते पर चलेंगे. क्योंकि उनका अब तक का राजनीतिक सफर बेबुनियाद राजनीतिक आरोपों पर ही आधारित रहा है.’

यह पूछने पर कि अगर आम आदमी पार्टी फिर से हमले की पुरानी रणनीति पर लौटती है तो भाजपा की रणनीति क्या होगी, वे कहते हैं, ‘निश्चित तौर पर हम आक्रामक ढंग से जवाब देंगे. लेकिन यह आक्रामकता कितनी होगी और किन मुद्दों पर होगी, इस बारे में शीर्ष नेतृत्व की ओर से जिन केंद्रीय नेताओं को दिल्ली की ​जिम्मेदारी दी गई है, वे ही तय करेंगे. केजरीवाल को घेरने के लिए मुद्दों का चयन बेहद अहम है. गलत ​मुद्दों पर घेरने की कोशिश का भाजपा को नुकसान हो सकता है.’