1-एक सितंबर से नए ट्रैफिक नियमों के अमल में आने के बाद से जुर्माने की रकम नए-नए रिकॉर्ड बना रही है. इस बीच कई राज्यों ने या तो इन नियमों को बदलकर जुर्माना कम कर दिया है या फिर नए नियम लागू ही नहीं किए हैं. इस मुद्दे को लेकर बीबीसी पर सुधीश पचौरी का व्यंग्य

ट्रैफिक नियम: हे जनता तू लाइन में लग और सभ्य बन

2-फैलता रेगिस्तान यानी मरुस्थलीकरण आज एक बड़ी समस्या बन चुका है. हाल में इस मुद्दे पर आयोजित संयुक्त राष्ट्र के एक सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐलान किया कि भारत 2030 तक 2.1 करोड़ हेक्टेयर के बजाय अब 2.6 करोड़ हेक्टेयर बंजर भूमि को दुरुस्त करेगा. इस कवायद के अलग-अलग पहलुओं को टटोलती द प्रिंट हिंदी पर अभय मिश्रा की रिपोर्ट

भारत को मरुस्थल घटाने हैं तो महान प्रधानमंत्रियों को इसपर अपने मासूम विचार छोड़ने पड़ेंगे

3-देश में भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या यानी मॉब लिंचिंग की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रहीं. एक अगस्त से अब तक इनमें 30 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है. इस खतरनाक चलन की वजहों पर द वायर हिंदी पर महताब आलम का लेख

क्यों जारी है मॉब लिंचिंग का सिलसिला?

4-लंबे समय से अफ्रीका की छवि भुखमरी से जूझते महाद्वीप की रही है. लेकिन अब यहां मोटापा बड़ी समस्या बन कर खड़ा है. वयस्कों में सबसे तेजी से बढ़ते मोटापे के मामले में चोटी के 20 देशों में आठ देश अफ्रीका से हैं. डॉयचे वेले पर यह छपा यह लेख इस मुद्दे की पड़ताल करता है.

मोटापे जैसी महामारी की चपेट में कैसे आए सबसे गरीब देश

5-बस्तर का नाम सुनते ही ज्यादातर लोगों को नक्सलवाद का ध्यान आता है. लेकिन छत्तीसगढ़ का यह इलाका अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी जाना जाता है. मॉनसून में तो यह सुंदरता और भी बढ़ जाती है. घुमक्कड़ी के शौकीनों के लिए नीरज मुसाफिर का यह लेख.

मानसून में बस्तर: दंतेवाड़ा, समलूर और बारसूर