सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अपनी रजिस्ट्री से कहा कि वह उसे सूचित करे कि क्या अयोध्या में रामजन्म भूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मुकदमे की सुनवाई का सीधा प्रसारण संभव है. अयोध्या मामले के सीधे प्रसारण की मांग वाली याचिका आरएसएस के पूर्व विचारक केएन गोविंदाचार्य ने दायर की है. इसी संबंध मेें सुप्रीम कोर्ट ने यह जानकारी मांगी है.

सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एसए बोबडे और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की पीठ ने रजिस्ट्री से जानना चाहा कि यदि अयोध्या मामले की सुनवाई का सीधा प्रसारण करना संभव हो तो ऐसा करने के लिये कितना समय चाहिए. पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘रजिस्ट्री यह बताये कि क्या सीधा प्रसारण हो सकता है और ऐसा करने के लिये कितना समय लगेगा.’ राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के पूर्व विचारक केएन गोविन्दाचार्य की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने कहा कि याचिकाकर्ताओं का शीर्ष अदालत में पूरा विश्वास है लेकिन इस प्रकरण के अधिकांश याचिकाकर्ता रोजाना सुनवाई के लिये नहीं आ सकते हैं. उन्होंने कहा कि चूंकि वे कार्यवाही देख नहीं सकते हैं, इसलिए इसका सीधा प्रसारण उन्हें सुनवाई के विवरण के बारे में जानकारी देने में मददगार होगा. याचिका में शीर्ष अदालत के 26 सितंबर, 2018 के फैसले का भी हवाला दिया गया है, जिसमें संवैधानिक और राष्ट्रीय महत्व के मामलों में न्यायालय की कार्यवाही के सीधे प्रसारण की अनुमति दी गयी थी.

राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील अयोध्या के रामजन्म भूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद का मध्यस्थता के माध्यम से सर्वमान्य समाधान खोजने का प्रयास विफल होने के बाद प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ छह अगस्त से इस मामले की नियमित सुनवाई कर रही है.