पाकिस्तान ने कहा है कि बहुप्रतीक्षित करतारपुर गलियारा 09 नवंबर को भारतीय सिख श्रद्धालुओं के लिये खोल दिया जाएगा. पाकिस्तान ने यह ऐलान जम्मू-कश्मीर से विशेष दर्जा वापस लेने के भारत सरकार के फैसले के बाद नयी दिल्ली के साथ बीच उपजे विवाद के बीच किया है.

पीटीआई के मुताबिक सोमवार को स्थानीय और विदेशी पत्रकार पहली बार नरोवाल में प्रस्तावित करतारपुर गलियारे की यात्रा पर गए थे जिस दौरान पाकिस्तान ने यह घोषणा की. पाकिस्तान की ओर से इस परियोजना के निदेशक आतिफ माजिद ने दौरे पर आए पत्रकारों को बताया कि अब तक गलियारे का 86 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और इसे 09 नवंबर को खोल दिया जाएगा.

आतिफ माजिद ने जानकारी देते हुए यह भी कहा, ‘शुरू में भारत से रोजाना पांच हजार सिख श्रद्धालु ही आएंगे और बाद में यह संख्या बढ़कर दस हजार हो जाएगी. हर दिन भारत से पांच हजार सिख तीर्थयात्रियों के आगमन के लिये लगभग 76 आव्रजन केन्द्र स्थापित कर लिए गए हैं...कुल 152 आव्रजन केन्द्र स्थापित करने की योजना है.’

दोनों देशों के बीच बन रहा यह गलियारा पाकिस्तान स्थित गुरुद्वारा करतारपुर साहिब और भारत के गुरदासपुर में डेरा बाबा नानक साहिब को जोड़ेगा. करतारपुर साहिब गुरुद्वारा की स्थापना सिखों के संस्थापक गुरु गुरुनानक देव जी ने 1522 में की थी. पाकिस्तान करतारपुर में गुरुद्वारा दरबार साहिब के लिए भारतीय सीमा तक गलियारे का निर्माण कर रहा है, जबकि पंजाब के गुरदासपुर जिले में डेरा बाबा नानक से दूसरे हिस्से तक का निर्माण भारत द्वारा किया जाएगा.

दोनों देश इस बात पर सहमत हुए हैं कि पाकिस्तान गलियारे के जरिये प्रतिदिन पांच हजार श्रद्धालुओं को अपने यहां आने की अनुमति देगा. यह भारत-पाकिस्तान के बीच 1947 के बाद से अब तक का पहला वीजा मुक्त गलियारा होगा. गलियारा बनने के बाद भारतीय श्रद्धालुओं को सिर्फ परमिट हासिल कर आवाजाही की सुविधा मिलेगी.