उत्तर प्रदेश ही नहीं, पांच दूसरे राज्यों में भी मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों का इन्कम टैक्स सरकारी खजाने यानी जनता की जेब से भरा जा रहा है. द टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक ये राज्य हैं - मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड. पंजाब में भी मार्च 2018 तक ऐसा किया जा रहा था, लेकिन मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने इससे संबंधित कानून को खत्म कर दिया. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी ऐसा करने का ऐलान कर चुके हैं.

उत्तर प्रदेश में यह कानून चार दशक पहले वजूद में आया था. उत्तर प्रदेश मंत्री वेतन, भत्ते एवं विविध कानून 1981 में उस समय बना जब विश्वनाथ प्रताप सिंह राज्य के मुख्यमंत्री थे. इस कानून के चलते अब तक 19 मुख्यमंत्रियों और लगभग 1000 मंत्रियों को लाभ हुआ है. विश्वनाथ प्रताप सिंह के सहयोगी रहे कांग्रेस के एक नेता ने बताया कि इस कानून के पारित होते समय तत्कालीन मुख्यमंत्री ने विधानसभा में तर्क दिया था कि राज्य सरकार को मंत्रियों के आयकर का बोझ उठाना चाहिए क्योंकि अधिकांश मंत्री गरीब पृष्ठभूमि से हैं और उनकी आय कम है.

लेकिन, अगर पिछले कुछ चुनाव में उत्तर प्रदेश के बड़े नेताओं के चुनावी हलफनामों को देखा जाए तो उनकी संपत्ति लाखों-करोड़ों में है. 2012 के राज्यसभा चुनावों के समय दाखिल हलफनामे के अनुसार उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने अपनी संपत्ति 111 करोड़ रुपये दर्शायी थी. लोकसभा चुनाव के समय दाखिल हलफनामे के अनुसार पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की भी उनकी पत्नी डिम्पल के साथ 37 करोड़ रुपये से अधिक की निजी संपत्ति है. विधान परिषद के 2017 के चुनाव के समय दाखिल हलफनामे के मुताबिक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की संपत्ति भी 95 लाख रुपये से अधिक है. दिलचस्प बात यह थी कि राज्य सरकार पिछले चार दशकों से मंत्रियों का आयकर चुका रही थी लेकिन उत्तर प्रदेश के अधिकांश राजनेताओं को भी इस कानून की जानकारी नहीं थी.