सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अयोध्या के राम-जन्मभूमि बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले से जुड़े पक्ष यदि इसे मध्यस्थता के जरिए सुलझाना चाहते हैं तो वे अब भी ऐसा कर सकते हैं. पीटीआई के मुताबिक प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अगुवाई वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा कि उसे सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एफएमआई कलीफुल्ला का पत्र मिला है. इसमें कहा गया है कि कुछ पक्षों ने उन्हें मध्यस्थता प्रक्रिया फिर शुरू करने के लिए पत्र लिखा है.

कलीफुल्ला ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाए गए तीन सदस्यीय मध्यस्थता पैनल की अगुवाई की थी. पैनल में आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर के अलावा वरिष्ठ वकील श्रीराम पंचू को भी शामिल किया गया था. हालांकि वह अपने मकसद में असफल रहा था. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की रोजाना के आधार पर सुनवाई शुरू की थी. अदालत ने कहा कि न्यायमूर्ति कलीफुल्ला की अगुवाई में मध्यस्थता प्रक्रिया अब भी जारी रह सकती है और उसकी कार्यवाही गोपनीय रखी जाएगी.

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि भूमि विवाद मामले में रोजाना के आधार पर कार्यवाही बहुत आगे पहुंच गई है और यह जारी रहेगी. शीर्ष अदालत के मुताबिक उसे उम्मीद है कि सुनवाई 18 अक्टूबर तक खत्म हो जाए. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 2010 में अयोध्या की विवादित भूमि को तीनों पक्षों में बराबर बांटने का निर्देश दिया था. लेकिन तीनों पक्ष इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए थे.