दलाई लामा के स्वास्थ्य को लेकर चिंताओं के बीच अमेरिका चीन के लिए कुछ सीमाएं तय करने पर विचार कर रहा है ताकि वह तिब्बतियों के सर्वोच्च आध्यात्मिक गुरु का उत्तराधिकारी चुनने में हस्तक्षेप न कर पाए. पीटीआई के मुताबिक अमेरिकी संसद में हाल में एक विधेयक पेश किया गया है. इसमें किसी भी चीनी अधिकारी के तिब्बती बौद्ध उत्तराधिकार परंपराओं में हस्तक्षेप पर प्रतिबंध की अपील की गई है. उधर, पूर्वी एशिया के लिए विदेश मंत्रालय के शीर्ष अधिकारी डेविड स्टीलवेल ने संसद के सामने कहा है कि अमेरिका तिब्बतियों की सार्थक स्वायत्तता के लिए दबाव बनाता रहेगा. जानकारों की मानें तो अमेरिका चीन को पहले ही यह साफ करने की सोच रहा है कि अगर वह दलाई लामा का उत्तराधिकारी चुनने की प्रक्रिया में हस्तक्षेप करेगा तो उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपमान झेलना पड़ेगा.

84 साल के 14वें दलाई लामा ने अपनी लगातार यात्राओं को कम कर दिया है. उन्हें इस साल की शुरुआत में सीने में संक्रमण के चलते अस्पताल में भर्ती भी कराया गया था. हालांकि इस बात के कोई संकेत नहीं हैं कि उन्हें स्वास्थ्य से जुड़ी कोई गंभीर समस्या है. तिब्बती कार्यकर्ता और चीन इस बात से भली-भांति परिचित हैं कि दलाई लामा का निधन हिमालयी क्षेत्र (तिब्बत) को ज्यादा स्वायत्तता देने के उनके प्रयासों के लिए एक बड़ा झटका साबित होगा. चीन ने दलाई लामा के प्रतिनिधियों से नौ सालों से कोई बातचीत नहीं की है. उसने लगातार यह संकेत दिया है कि दलाई लामा का उत्तराधिकारी वही चुनेगा जिसके बारे में उसका मानना है कि वह तिब्बत पर उसके शासन का समर्थन करेगा.

नये दलाई लामा का चयन कैसे हता है?

तिब्बती समाज में मान्यता है कि दलाई लामा के निधन के बाद उनका पुनर्जन्म होता है. जिस बच्चे के रूप में यह पुनर्जन्म होता है उसकी खोज धर्मगुरू करते हैं. तिब्बत के शीर्ष धर्मगुरुओं ने पिछले दलाई लामा की मौत के समय ही जन्मे एक बच्चे की खोज में ग्रामीण तिब्बत की खाक छानी थी. चार साल की खोज के बाद एक छोटे से बच्चे ने पिछले दलाई लामा से जुड़ी चीजों को पहचान लिया था. वह बच्चा ही मौजूदा दलाई लामा हैं.

लेकिन मौजूदा दलाई लामा इस प्रक्रिया में चीनी हस्तक्षेप से बचने के उपाय खोज रहे हैं. वे कई बार कह चुके हैं कि अगर उनका पुनर्जन्म होता है तो वह चीन शासित प्रदेश या किसी ऐसे इलाके में नहीं होगा जो स्वतंत्र नहीं है. कुछ समय पहले एक साक्षात्कार में उन्होंने यह भी कहा था कि वे अपना उत्तराधिकारी अपने जीवनकाल में चुन सकते हैं या धर्मगुरुओं को यह काम सौंप सकते हैं. अगर ऐसा होता है तो परंपरा बदल सकती है.

कई जानकारों के मुताबिक दलाई लामा का ऐसा करने की वह है. जब उन्होंने तिब्बती धर्म में दूसरे सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति पंचेन लामा के लिए छह वर्ष के एक बच्चे को चुना था तो चीन ने उसे कैद कर लिया था. इसके बाद उसने तिब्बत में चीनी सत्ता के समर्थक व्यक्ति को इस पद के लिए चुन लिया था.