मुंबई की आरे कॉलोनी में 2,600 से अधिक पेड़ों को गिराए जाने के प्रस्ताव का विरोध कर रहे सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आज अमिताभ बच्चन के घर के बाहर प्रदर्शन किया. इसकी वजह मुंबई मेट्रो परियोजना के समर्थन में इस सुपरस्टार का ट्वीट है. प्रदर्शनकारियों ने ‘आरे को बचाओ’ और ‘बगीचों से जंगल नहीं बनते’ जैसे नारों वाले बैनर और पोस्टर पकड़ रखे थे.

मेट्रो कार शेड के लिए आरे कॉलोनी में पेड़ गिराए जाने हैं. इसे लेकर अमिताभ बच्चन ने मंगलवार को ट्वीट किया था, ‘मेरे एक मित्र को आपात चिकित्सकीय मदद की आवश्यकता थी. उसने अपनी कार के बजाए मेट्रो से जाने का फैसला किया... वह बहुत प्रभावित होकर लौटा... उसने कहा कि यह अधिक तेज, सुविधाजनक और सबसे बढ़िया है... प्रदूषण के लिए समाधान... और पेड़ लगाएं... मैंने अपने बगीचे में पेड़ लगाए थे... क्या आपने लगाए?’ इसके बाद मुंबई मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक अश्विनी भिड़े ने मेट्रो परियोजना की प्रशंसा करने के लिए अमिताभ बच्चन की सराहना की. उन्होंने ट्वीट किया, ‘बच्चन साहब, मेट्रो की महत्ता संक्षिप्त में बताने के लिए धन्यवाद.’

इसके बाद अमिताभ बच्चन का विरोध शुरू हो गया. पेड़ गिराने को लेकर नगर निकाय की मंजूरी के खिलाफ बंबई उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने वाले पर्यावरण कार्यकर्ता जोरु भाठेना ने कहा, ‘प्रिय एमएमआरडीए अधिकारी, मैंने सुना है कि आप अपनी विभिन्न मेट्रो परियोजनाओं के लिए कास्टिंग यार्ड के निर्माण के लिए भूखंड देख रहे हैं. क्या बच्चन जी का बगीचा पर्याप्त होगा? मुझे लगता है कि आपको अपनी जरूरतों के लिए ठीक क्षेत्र मिल जाएगा...और मुझे भरोसा है कि उन्हें भी ऐसा करने में खुशी होगी.’

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने लिखा, ‘प्रिय बच्चन जी. मैं आपसे अपने बगीचे की रक्षा करना छोड़कर आपका इंतजार कर रहे हमारे दोस्तों के साथ जुड़ने का अनुरोध करता हूं. श्रीमान, आइए आपको आरे ले चलें, जिससे आपका नजरिया बदल जाएगा. आरे इंतजार कर रहा है?’

आरे कॉलोनी मुंबई महानगर का बड़ा हरित क्षेत्र है. शिव सेना नेता आदित्य ठाकरे इलाके में पेड़ गिराने के प्रस्ताव के खिलाफ काफी मुखर रहे हैं. सामाजिक कार्यकर्ता मेट्रो कार शेड परियोजना को कहीं और बनाए जाने की मांग कर रहे हैं. बॉलीवुड की कई हस्तियों और नेताओं ने भी इन कार्यकर्ताओं को अपना समर्थन दिया है. उधर, इस मामले पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रविवार को कहा था कि आरे की यह जमीन सरकारी भूमि है जो वन क्षेत्र में नहीं आती.