सुप्रीम कोर्ट जल्द ही एक स्थायी संविधान पीठ बनाने वाला है. भारत के 70 साल के न्यायिक इतिहास में ऐसा पहली बार होगा. पांच जजों की यह संविधान पीठ साल भर संवैधानिक मामलों और कानून की व्याख्या से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई करेगी. अभी तक की प्रक्रिया यह रही है कि जरूरत पड़ने पर ही इस पीठ का गठन किया जाता है. जैसे इन दिनों अयोध्या भूमि विवाद की सुनवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अगुवाई में एक पांच सदस्यीय संविधान पीठ बनाई गई है.

1950 में सुप्रीम कोर्ट में जजों की कुल संख्या आठ थी. आज यह 34 है. मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कुछ समय पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने के लिए एक पत्र लिखा था. उनका कहना था कि मामलों की संख्या को देखते हुए यह जरूरी है. उसके बाद संसद में संबंधित कानून में संशोधन करते हुए इसकी राह साफ की गई.

पिछले तीन दशक से संविधान पीठों का गठन संबंधित मुख्य न्यायाधीशों के लिए बड़ी चुनौती रहा है. इसकी वजह जजों की संख्या में कमी भी रही और यह भी कि इस दौरान जनहित याचिकाओं के जरिये शीर्ष अदालत के पास आने वाले मामलों की संख्या बढ़ती गई है.