1- बीते शुक्रवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कॉरपोरेट टैक्स में कटौती सहित कई अहम ऐलान किए. जानकारों का मानना है कि हाल में इस तरह के कई ऐलान करते हुए वित्त मंत्री ने एक लिहाज से पांच जुलाई को पेश किए गए बजट को व्यावहारिक तौर पर पूरी तरह पलट दिया है. पर क्या इससे मंदी के हालात सुधरेंगे? बीबीसी पर वरिष्ठ पत्रकार पूजा मेहरा का लेख.

मोदी सरकार क्या बजट में हुई चूक को अब सुधार पाएगी?

2- जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म करने के भारत के फैसले के खिलाफ पाकिस्तान दुनिया भर से समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है. न्यूजलॉन्ड्री हिंदी पर कुमार प्रशांत बता रहे हैं कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर का सवाल इमरान जिस तरह उठा व उठवा रहे हैं, उससे पाकिस्तान का मखौल भी बन रहा है और आम पाकिस्तानी का मनोबल भी टूट रहा है.

इमरान ख़ान : बिखरते देश का भटकता प्रधानमंत्री

3- इस बार हिंदी दिवस पर गृह मंत्री अमित शाह का एक ट्वीट विवाद का सबब बन गया. उन्होंने कहा था कि आज देश को एकता की डोर में बांधने का काम अगर कोई एक भाषा कर सकती है तो वह सर्वाधिक बोली जाने वाली हिंदी भाषा ही है. इस पर डीएमके सहित कई दलों ने विरोध जताया. इस पूरे मुद्दे को लेकर द प्रिंट हिंदी पर योगेंद्र यादव की टिप्पणी.

हिंदी के वर्चस्व को छोड़िए, असल मुद्दा भाषा की ताकत और ताकत की भाषा के बीच है

4- भारत के गांव राजनीतिक, धार्मिक और जातिगत मतभेदों से त्रस्त रहते हैं. बड़े संकट के सामने आने पर भी ये मतभेद लोगों को एकजुट नहीं होने देते. लेकिन क्या मयंक गांधी का पर्ली प्रयोग सबके लिए नजीर बन सकता है? डॉयचे वेले हिंदी पर यूलिया हेनरिषमन की रिपोर्ट.

ग्राम स्वराज को जिंदा करता एक और गांधी

5- सोशल मीडिया पर बच्चा चोरी की अफवाहों के चलते देश के अलग-अलग हिस्सों में पिछले तीन महीनों के दौरान भीड़ 15 से ज्यादा लोगों को मौत के घाट उतार चुकी है. अल्ट न्यूज पर जिन्नेश पटेल की यह रिपोर्ट बताती है कि कैसे यूट्यूब पर इस डर का कारोबार हो रहा है.

डर का कारोबार: यूट्यूब पर बच्चा चोरी के नाटकीय वीडियो को मिल रहे हैं करोड़ों दर्शक