अमेरिका की एक सप्ताह की यात्रा के पहले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के तेल और गैस क्षेत्र की कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) के साथ बैठक की. हयूस्टन में हुई इस बैठक में भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अवसरों के दोहन पर चर्चा हुई.

पीटीआई के मुताबिक यह गोलमेज बैठक ऊर्जा सुरक्षा के लिए साथ मिलकर काम करने और भारत-अमेरिका के बीच साझा निवेश के अवसरों को बढ़ाने पर केन्द्रित थी. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने बताया कि बैठक में 17 वैश्विक ऊर्जा कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी शामिल हुए. इन कंपनियों की उपस्थिति 150 देशों में है और इनका सामूहिक नेटवर्थ 1,000 अरब डॉलर है. उन्होंने बताया कि से सभी कंपनियों किसी न किसी रूप में भारत से जुड़ी हैं. बैठक में इन्होंने भारत में अपनी मौजूदगी को बढ़ाने के बारे में बात की और क्षेत्र में नियमनों में ढील के कदमों का स्वागत किया.

बैठक के दौरान अमेरिका की प्राकृतिक गैस कंपनी टेल्यूरियन इंक और भारत की पेट्रोनेट एलएनजी कंपनी लि. (पीएलएल) ने एक सहमति ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए. इसके तहत पीएलएल और उसकी सहायक इकाइयां अमेरिका से सालाना 50 लाख टन तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) का आयात करेंगी.

बैठक के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ट्वीट में लिखा, ‘यह संभव नहीं है कि ह्यूस्टन आएं और ऊर्जा पर बातचीत ना हो. ऊर्जा क्षेत्र के शीर्ष सीईओ के साथ शानदार बातचीत हुई. हमने ऊर्जा क्षेत्र में अवसर उत्पन्न करने के तरीकों पर चर्चा की.’

हयूस्टन में रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘एनआरजी फुटबॉल स्टेडियम’ में ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम में 50 हजार से अधिक भारतीय-अमेरिकियों को संबोधित करने वाले हैं. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इस समारोह में शिरकत करेंगे. पोप के अलावा अन्य किसी विदेशी नेता के लिए यहां आयोजित किया जा रहा यह अब तक का सबसे बड़ा कार्यक्रम है.