तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा ने सोमवार को कहा कि ‘दलाई लामा’ की परंपरा जारी रहना आवश्यक नहीं, बल्कि बुद्ध की शिक्षाओं पर चलना जरूरी है. दलाई लामा ने यह बात उत्तर प्रदेश के मथुरा में उदासीन कार्ष्णि आश्रम में मीडिया से बात करते हुए कही.

पंद्रहवें दलाई लामा के नाम निर्धारण और उसके भारत से संबंधित होने के बारे में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में तिब्बती धर्मगुरु ने कहा, ‘यह महत्वपूर्ण नहीं है कि अगला दलाई लामा कौन होगा, कौन नहीं होगा. यह भी जरूरी नहीं कि ‘दलाई लामा’ की परंपरा जारी रहेगी भी कि नहीं.’ दलाई लामा ने कहा, ‘तिब्बत के लोगों के लिए बौद्ध धर्म का रहना जरूरी है, न कि ‘दलाई लामा’ की परंंपरा. सबसे ज्यादा जरूरी यह है कि हम बुद्ध की शिक्षाओं को कितना मानते हैं, कितना उन्हें धारण कर उन पर चलते हैं.’

तिब्बत के हितों की रक्षा के लिए एक अमेरिकी सांसद द्वारा विधेयक पेश किए जाने से संबंधित एक सवाल के जवाब में दलाई लामा ने कहा, ‘अमेरिका एक सशक्त देश है. जब 1959 में हमने तिब्बत पर चीनी कब्जे के विरोध में संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव पेश किया था, तब अमेरिका ने ही सबसे पहले हमारा समर्थन किया था.’ मैसाचुसेट्स के डेमोक्रेट सांसद जेम्स मैक्गोवर्न ने अमेरिकी कांग्रेस में बीते 13 सितंबर को ‘द तिब्बतन पॉलिसी एंड सपोर्ट एक्ट 2019’ नामक विधेयक पेश किया था, जिसमें तिब्बतियों के हितों की रक्षा से संबंधित बात कही गई है.