अस्सी के दशक में आई हॉलीवुड फिल्म ब्लेड रनर में अपने समय से आगे 2019 की कहानी दिखाई गई थी. इसमें कृत्रिम मानवों की कल्पना की गई थी. अभी तक वैसा नहीं हो पाया है, लेकिन पीटीआई के मुताबिक पश्चिमी जापान के एक गुप्त शोध संस्थान में रोबोट विज्ञानी हिरोशी इशिगुरो ऐसी प्रौद्योगिकी पर काम कर रहे हैं जो मनुष्य और मशीन के बीच के अंतर को धुंधला कर सकती है. इशिगुरो और उनकी टीम का अनुमान है कि भविष्य के रोबोट बेहद बुद्धिमान, सजग और मददगार होंगे, साथ ही वे इंसानों की तरह बर्ताव करेंगे और वे उनके दोस्त भी बन सकते हैं.

ओसाका विश्वविद्यालय के प्राध्यापक इशिगुरो ने बताया, ‘मुझे नहीं पता कि ‘ब्लेड रनर’ कब साकार होगा, लेकिन मेरा मानना है कि ऐसा होगा.’ उनका कहना था, ‘हर साल हम नई प्रौद्योगिकी का विकास कर रहे हैं, जैसे डीप लर्निंग जिसने पैटर्न की पहचान करने की क्षमता को बेहतर बनाया है.’ उन्होंने बताया, ‘अब हम इरादों और लालसाओं पर काम कर रहे हैं, और अगर हम उन्हें रोबोटों में ला सके तो वे और अधिक इंसानों जैसे हो जाएंगे.’

जापान में पहले ही खाना बनाने से लेकर मरीजों की देखभाल तक तमाम कामों में रोबोटों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहा है. वहां ऐसे रोबोट इस्तेमाल में हैं जो मरीजों को व्हीलचेयर पर टहलाने में सक्षम हैं. वैज्ञानिकों का विश्वास है कि सर्विस रोबोट एक दिन कूड़ा उठाने से लेकर स्वादिस्ट टोस्ट तैयार करने तक घर के सभी कामों में मदद करेंगे.

हिरोशी इशिगुरो और उनकी रोबोटिक कॉपी

इशिगुरो इससे पहले जटिल मूविंग पार्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, सिलिकॉन त्वचा और अपने बालों की मदद से अपनी खुद की रोबोट कॉपी तैयार कर चुके हैं. इसे उन्होंने अपनी जगह एक कारोबारी दौरे पर भी भेजा था. ऐसे रोबोटों के लिए एक्ट्रॉयड शब्द इस्तेमाल किया जाता है. इशिगुरो को विश्वास है कि रोबोटिक्स और कृत्रिम मेधा (आर्टफिशियल इंटेलिजेंस) के क्षेत्र में हाल में हुई खोजों से आदमी और मशीन के बीच समानता बढ़ेगी. उन्होंने कहा, ‘एक वैज्ञानिक के रूप में मुझे विश्वास है कि ऐसा रोबोट तैयार होगा, जिसकी आत्मचेतना होगी जैसा कि आपने ब्लेड रनर में देखा था.’