सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह उसे सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर रोक संबंधी दिशा-निर्देश बनाने की समय-सीमा बताए. पीटीआई के मुताबिक अदालत ने कहा कि सोशल मीडिया पर संदेश या कोई अन्य सामग्री डालने वाले का पता लगाना एक गंभीर मुद्दा है और इसके लिए नीति की जरूरत है. सुप्रीम कोर्ट का यह भी कहना था कि तकनीक खासकर सोशल मीडिया का दुरुपयोग खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है और अब सरकार को इसमें दखल देना ही चाहिए. शीर्ष अदालत ने कहा कि वह इस मुद्दे पर फैसला लेने में सक्षम नहीं है और सरकार ही है जो इस पर दिशा-निर्देश ला सकती है.

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने आधार को सोशल मीडिया प्रोफाइल से लिंक करने संबंधी मामले में केंद्र सरकार से जवाब मांगा था. शीर्ष अदालत ने पूछा था कि क्या सोशल मीडिया अकाउंट्स को रेग्युलेट करने के लिए उन्हें आधार से जोड़ने की सरकार की कोई योजना है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इस मामले में जल्द फैसला लिए जाने की जरूरत है.

यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब तमिलनाडु सरकार ने सोशल मीडिया प्रोफाइल को आधार से लिंक कराने संबंधी पहल की. उसका तर्क है कि ऐसा होने से सोशल मीडिया के जरिए राष्ट्रविरोधी और आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने वालों पर नकेल कसी जा सकेगी. राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में यह भी कहा है कि ऐसा करने के बाद फेक न्यूज, आपत्तिजनक और पोर्नोग्राफिक कंटेंट पोस्ट करने वालों की पहचान भी संभव हो पाएगी. तमिलनाडु सरकार की इस पहल पर फेसबुक को एतराज है. उसका कहना है कि आधार को सोशल मीडिया अकाउंट से लिंक करने पर यूजर्स की प्राइवेसी खत्म हो जाएगी जो प्राइवेसी नियमों का उल्लंघन होगा.