एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने आज मुंबई स्थित प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के दफ्तर जाने की योजना टाल दी है. पीटीआई के मुताबिक ईडी ने एक मेल भेजकर उनसे कहा था कि जरूरत पड़ने पर उनको बुलाया जाएगा और आज उनकी उपस्थिति की आवश्यकता नहीं है. महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक के भ्रष्टाचार से जुड़े मनी लॉन्डरिंग के मामले में नाम आने के बाद शरद पवार ने कहा था कि वे जांच में पूरा सहयोग करेंगे. इसी सिलसिले में उन्होंने खुद ही ईडी कार्यालय जाने की घोषणा की थी.

हालांकि ईडी के मेल के बावजूद शरद पवार उसके दफ्तर जाने की जिद पर अड़े थे. यह देखते हुए जांच एजेंसी के दफ्तर के आसपास धारा 144 लगा दी गई. इसके बाद मुंबई पुलिस कमिश्नर संजय बार्वे ने शरद पवार से उनके आवास पर मुलाकात की और उनसे कानून-व्यवस्था का हवाला देकर ईडी के दफ्तर नहीं जाने का अनुरोध किया. इसके बाद एनसीपी मुखिया ने अपना विचार बदल दिया.

बाद में शरद पवार ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान इस मामले पर उनका समर्थन करने के लिए शिवसेना और कांगेस का शुक्रिया अदा किया. उन्होंने यह भी कहा कि एजेंसी के कदम से ऐसा लगता है जैसे विपक्षी नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है. यह मामला ऐसे समय दर्ज किया गया है, जब महाराष्ट्र में 21 अक्टूबर को विधानसभा चुनाव होने हैं. एनसीपी ने इसे राजनीति से प्रेरित कदम करार दिया है.

ईडी ने महाराष्ट्र सहकारी बैंक घोटाले में शरद पवार के साथ उनके भतीजे और पूर्व उप मुख्यमंत्री अजीत पवार और कई अन्य के खिलाफ मनी लॉन्डरिंग का केस दर्ज किया है. माना जा रहा है कि यह घोटाला करीब 25 हजार करोड़ रु का है. बताया जाता है कि राज्य सहकारी बैंक से शक्कर कारखानों और कपड़ा मिलों को बेहिसाब कर्ज बांटे गए. इसके अलावा कर्ज वसूली के लिए जब कर्जदारों की संपत्ति बेची गई तो इस प्रक्रिया में भी जानबूझकर बैंक को नुकसान पहुंचाया गया.

जांच एजेंसी ने यह मामला मुंबई पुलिस की एक एफआईआर के आधार पर दर्ज किया है जिसमें बैंक के पूर्व अध्यक्ष, महाराष्ट्र के पूर्व उप मुख्यमंत्री अजीत पवार और सहकारी बैंक के 70 पूर्व पदाधिकारियों के नाम हैं. साल 2007 से 2011 के बीच हुए इस घोटाले में महाराष्ट्र के कई जिलों के बैंक अधिकारियों को भी आरोपित बनाया गया है.