अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ महाभियोग की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. अमेरिका के निचले सदन ‘हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स’ की अध्यक्ष नैन्सी पेलोसी ने बीते हफ्ते इसका ऐलान किया था. उन्होंने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप ने अपने डेमोक्रेटिक प्रतिद्वंदी जो बिडेन को नुकसान पहुंचाने के लिए विदेशी ताकतों का इस्तेमाल कर अपने पद की शपथ का उल्लंघन किया है.

डोनाल्ड ट्रंप पर आरोप है कि उन्होंने बीते जुलाई माह में यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लोदीमीर ज़ेलेंस्की पर दबाव बनाया कि वे डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता और पूर्व उपराष्ट्रपति जो बिडेन और उनके बेटे के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच शुरू करें. बताया जाता है कि ट्रंप ने ज़ेलेंस्की के ऐसा न करने पर यूक्रेन को दी जाने वाली अमेरिकी सैन्य मदद रोकने की धमकी दी थी. डोनाल्ड ट्रंप ने इन आरोपों से इनकार किया है. हालांकि उन्होंने यह माना है कि उन्होंने अपने राजनीतिक प्रतिद्वंदी के बारे में यूक्रेन के राष्ट्रपति से चर्चा की थी. उनका यह भी कहना है कि उन्होंने सैन्य मदद रोकने की धमकी इसलिए दी थी ताकि यूरोप भी यूक्रेन की मदद के लिए आगे आए.

जो बिडेन के बेटे हंटर बिडेन उस समय यूक्रेनी गैस कंपनी ‘बुरिस्मा’ के बोर्ड के सदस्य थे, जब उनके पिता अमेरिका के उपराष्ट्रपति थे और ओबामा प्रशासन में यूक्रेन मामलों की जिम्मेदारी संभाले हुए थे. डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि जो बिडेन ने अमेरिका का उपराष्ट्रपति रहते हुए यूक्रेनी सरकार पर ‘बुरिस्मा’ में हुए भ्रष्टाचार की जांच को बंद करने के लिए दबाव डाला था.

हालांकि, जो बिडेन के साथ-साथ यूक्रेन के कई पूर्व अधिकारियों का भी कहना है कि उन पर लग रहे भ्रष्टाचार के आरोप मनगढ़ंत हैं. यूक्रेन के चर्चित पूर्व अभियोजक जनरल यूरी लुत्सेंको ने कहा है कि उन्होंने कई बार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निजी वकील रूडी गिउलिआनी को बताया है कि जो बिडेन और उनके बेटे के खिलाफ भ्रष्टाचार के कोई सबूत नहीं हैं, और इन दोनों ने किसी यूक्रेनी कानून को नहीं तोड़ा है. यूरी लुत्सेंको ने लॉस एंजिल्स टाइम्स से बातचीत में कहा, ‘मैंने उनसे (रूडी गिउलिआनी से) कहा कि मैं केवल इसलिए इस मामले की जांच शुरू नहीं कर सकता क्योंकि इसमें अमेरिकी राष्ट्रपति को दिलचस्पी है.... मैं तब ही इसकी जांच शुरू कर सकता हूं, जब पहले अमेरिकी अधिकारी अपने स्तर पर इस मामले की जांच शुरू करें.’

कई अमेरिकी जानकार भी कहते हैं कि जो बिडेन के खिलाफ कोई मामला नहीं बनता है. लेकिन अगले साल होने वाले चुनाव को देखते हुए डोनाल्ड ट्रंप, जो बिडेन की साख को नुकसान पहुंचाना चाहते हैं. ये लोग कहते हैं कि डोनाल्ड ट्रंप पूर्व उपराष्ट्रपति को निशाना बनाने के मौके ढूंढ़ते रहते हैं. बीते अप्रैल में जब ‘जो बिडेन’ ने राष्ट्रपति चुनाव में उतरने की घोषणा की थी तब इसके कुछ ही घंटे बाद डोनाल्ड ट्रंप ने उन पर जमकर निशाना साधा था. उस समय उन्होंने बिडेन को मानसिक रूप से बीमार तक बता दिया था.

पूर्व उपराष्ट्रपति को लेकर ट्रंप की इस तरह की प्रतिक्रियाओं को देखते हुए यह कहा जा रहा है कि डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति चुनाव में बिडेन की दावेदारी से डरे हुए हैं. बीते साल नवंबर में जब जो बिडेन के चुनाव में कूदने की चर्चा शुरू हुई थी तो अमेरिकी न्यूज़ वेबसाइट पॉलिटिको ने डोनाल्ड ट्रंप और उनके एक सहयोगी के बीच हुई वार्ता को जगजाहिर किया था. इस वार्तालाप में ट्रंप अपने सहयोगी से बार-बार पूछ थे कि क्या हम बिडेन को हरा पाएंगे.

अमेरिकी जानकार डोनाल्ड ट्रंप के जो बिडेन से डरने की सबसे बड़ी वजह उनकी लोकप्रियता और राजनीतिक अनुभव को बताते हैं. बिडेन 1973 से 2008 तक लगातार सीनेटर रहे. इसके बाद 2009 में बराक ओबामा ने उन्हें उपराष्ट्रपति के तौर पर चुना. उपराष्ट्रपति रहते हुए ओबामा की लगभग सभी योजनाओं को बनाने में उनकी मुख्य भूमिका रही थी. 2012 में समलैंगिक शादियों को कानूनी मंजूरी दिलवाने से लेकर इराक और अफगानिस्तान के खिलाफ जंग में भी बिडेन ने अहम किरदार निभाया था. इसके अलावा ओसामा बिन लादेन को ठिकाने लगाने की रणनीति को लेकर ओबामा ने उनकी कई बार प्रशंसा भी की थी. बराक ओबामा के साथ उनकी जोड़ी ने उन्हें अमेरिका में और भी लोकप्रिय बना दिया.

जानकारों की मानें तो डोनाल्ड ट्रंप अब तक जिन नेताओं से मुकाबले की सोचकर बैठे थे उनमें कोई भी बराक ओबामा और हिलेरी क्लिंटन के कद का नेता नहीं था. इनमें कोई ऐसा भी नहीं था जिसकी अमेरिका के हर राज्य में पकड़ हो. लेकिन, जो बिडेन के मामले में ऐसा नहीं है. सर्वेक्षण भी बताते हैं कि डोनाल्ड ट्रंप अगर किसी से राष्ट्रपति चुनाव हार सकते हैं तो वे जो बिडेन ही हैं.

जो बिडेन से जुड़ी जो दूसरी बात डोनाल्ड ट्रंप को परेशान कर रही है, वह है मध्यम वर्ग और वर्किंग क्लास वोटर्स के बीच उनकी लोकप्रियता. पिछले राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप को जिताने में इन वोटर्स की निर्णायक भूमिका थी. इसके अलावा बराक ओबामा के साथ मशहूर हुई उनकी जोड़ी की वजह से अफ़्रीकी मूल के अमेरिकियों के बीच भी वे काफी लोकप्रिय माने जाते हैं.

डोनाल्ड ट्रंप की 2016 में हुई जीत की वजह तीन राज्यों मिशिगन, पेन्सिल्वेनिया और विस्कॉन्सिन को माना जाता है. ये राज्य डेमोक्रेटिक पार्टी के गढ़ की तरह देखे जाते हैं लेकिन, 2016 में रिपब्लिकन पार्टी ने यहां पर जीत हासिल की थी. अगले साल होने वाले चुनाव को लेकर भी कहा जा रहा है कि अगर ट्रंप इन राज्यों को जीत लेते हैं तभी वे दुबारा अमेरिका के राष्ट्रपति बन पाएंगे. लेकिन, जो बिडेन के आने के बाद ट्रंप के लिए दोबारा यहां से जीत पाना मुश्किल लग रहा है. एक तो बिडेन खुद पेंसिल्वेनिया से आते हैं. दूसरा इन तीनों राज्यों में अफ़्रीकी-अमेरिकी, मध्यम वर्ग और वर्किंग क्लास की जनसंख्या ज्यादा है.

इसके अलावा विदेश नीति के महारथी जो बिडेन ने अधिकांश चुनावी मुद्दे निचले और मध्यम वर्ग को ध्यान में रखकर ही बनाए हैं. कहा जा रहा है कि ये सारे मुद्दे पिछले चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की जीत की वजह रही ‘अमेरिका प्रथम’ की नीति को सीधी टक्कर देंगे. यह भी डोनाल्ड ट्रंप की परेशानी की एक बड़ी वजह मानी जा रही है.