1-दुनिया की अर्थव्यवस्था तेल पर दौड़ती है. ऊर्जा उत्पादन के लिए ईंधन का सबसे बड़ा हिस्सा इसी से आता है. तेल की खोज से लेकर यहां तक हम कैसे पहुंचे? बीबीसी पर टिम हरफोर्ड का यह लेख इस सवाल का जवाब देने की कोशिश करता है.

तेल की धार ने कैसे बदल दी दुनिया की धारा

2- हाल में लगातार कई दिन तक हुई भारी बारिश ने बिहार की राजधानी पटना को झील में तब्दील कर दिया. स्थिति यहां तक हो गई कि उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी भी राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) द्वारा बचाए गए. एनडीटीवी खबर पर इस आपदा की पड़ताल करता रवीश कुमार का लेख.

बिहार के पानी-पानी होने की कहानी

3- सुस्त पड़ी अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए सरकार की कोशिशें जारी हैं. निर्यात के लिए नई नीति बनाने से लेकर कॉरपोरेट टैक्स में कटौती तक वित्त मंत्री ने हाल में कई विशेष उपायों का ऐलान किया है. लेकिन द प्रिंट के संपादक शेखर गुप्ता मानते हैं कि ये काफी नहीं हैं.

अर्थव्यवस्था इतनी बीमार है कि इसका इलाज होम्योपैथी से नहीं, सर्जरी से ही हो सकता है

4- महात्मा गांधी के जन्म के 150 साल पूरे होने पर देश और दुनिया में उनके विचारों पर चर्चा हो रही है. धर्म से लेकर आधुनिकता तक समाज को प्रभावित करने वाले हर बड़े मुद्दे पर गांधी के पास एक अलग दृष्टि थी. नदियों में बढ़ते प्रदूषण को लेकर उनके विचारों को लेकर डाउन टू अर्थ में प्रकाशित शुभनीत कौशिका का लेख.

गांधी, 21वीं सदी का पर्यावरणविद -5: नदियों में बढ़ती गंदगी से नाराज थे गांधी

5-अमेरिका और ईरान के बीच शुरू हुए ताजा तनाव का असर पूरे मध्य पूर्व पर है. लेबनान भी इसकी चपेट में आ गया है. यहां अमेरिका ने ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह पर प्रतिबंध लगा दिया है. डॉयचे वेले पर प्रकाशित यह लेख बताता है कि यदि हिजबुल्लाह अमेरिका के खिलाफ लड़ने का फैसला लेता है तो लेबनान की हालत भी वेनेजुएला जैसी हो सकती है.

हिज्बुल्लाह की वजह से लेबनान पर गहरा रहा है आर्थिक संकट