रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक मंगलवार को शुरु हो गई है. देश में आर्थिक सुस्ती को देखते हुए माना जा रहा है कि रिजर्व बैंक एक बार और अपनी ब्याज दरों में कटौती कर सकता है. इस बारे में आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास पहले ही संकेत दे चुके हैं. जानकारों के मुताबिक, यह कटौती 20 बेसिस प्वाइंट (.20 फीसदी) तक हो सकती है.

इस साल आरबीआई नीतिगत दरों (रेपो रेट) में कुल चार बार कटौती कर चुका है. चालू वित्तीय वर्ष में रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों में 1.10 फीसद की कटौती की है. अगस्त में हुई पिछली बैठक में एमपीसी में 0.35 प्रतिशत की कटौती की थी. उस कटौती के बाद रेपो दर 5.40 प्रतिशत पर आ गई है. इसके बाद माना जा रहा था कि शायद आगे आरबीआई कर्जों को और सस्ता न करें. लेकिन, जानकारों का कहना है कि खाद्य पदार्थों की महंगाई बढ़ने के बाद भी फिलहाल महंगाई दर चार फीसद से नीचे है, ऐसे में आर्थिक गतिविधियों में प्रोत्साहन के लिए ब्याज दरों में एक और कटौती की जा सकती है. जानकारों का कहना है कि कारपोरेट टैक्स में कटौती, जीएसटी घटाने जैसे उपायों के बाद राजकोषीय दृष्टि से सरकार के हाथ तंग हैं, ऐसे में सस्ते कर्ज के सहारे अर्थव्यवस्था में तेजी की कोशिश होगी.

इसके अलावा सस्ते कर्ज का लाभ आम ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए रिजर्व बैंक ने बैंकों से कहा है कि वे एक अक्टूबर से अपने कर्ज की दरें आरबीआई के रेपो रेट से जोड़े. ऐसा इसलिए किया जा रहा है कि क्योंकि आरबीआई के ब्याज दर घटाने के बाद भी बैंक उसका पूरा लाभ ग्राहकों को नहीं देते हैं. लेकिन, जानकारों का कहना है कि कर्ज के रेपो रेट से जुड़ने के बाद बैंक कर्ज सस्ते कर सकते हैं, लेकिन अपना बही खाता दुरुस्त करने के लिए छोटी बचत योजनाओं और फिक्स डिपॉजिट जैसी योजनाओं पर बैंक ब्याज कम भी कर सकते हैं.

आरबीआई के कर्ज सस्ता करने की संभावना के बीच महंगाई का सवाल भी उठ खड़ा हुआ है. हालांकि, अभी महंगाई दर आरबीआई के लक्ष्य चार फीसद से नीचे है. लेकिन, लगातार बढ़ते कच्चे तेल की कीमतें और खाद्य पदार्थों में आई तेजी के बीच माना जा रहा है कि आने वाले कुछ महीनों में महंगाई भी सर उठा सकती है.