कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के उस बयान पर विवाद हो गया है जिसमें उन्होंने मुस्लिमों और हिंदुओं के चरमपंथीकरण की तुलना की थी. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान के एक हालिया भाषण का हवाला देते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा था कि मुस्लिमों के चरमपंथीकरण की तरह हिंदुओं का चरमपंथीकरण भी खतरनाक है.

पीटीआई के मुताबिक कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर इंदौर में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा था, ‘आपने (संयुक्त राष्ट्र महासभा के 74वें सत्र में) पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान का हालिया भाषण सुना होगा जिसमें वह इस्लामोफोबिया और इस्लामी चरमपंथ की बात कर रहे थे. इसके विरोध में ‘रेडिकलाइजेशन ऑफ द हिंदूज’ (हिंदुओं का चरमपंथीकरण) की बात की जा रही है. ‘रेडिकलाइजेशन ऑफ द हिंदूज’ भी उतना ही खतरनाक है, जितना खतरनाक ‘रेडिकलाइजेशन ऑफ द मुस्लिम्स’ (मुस्लिमों का चरमपंथीकरण) है.’

उन्होंने आगे कहा, ‘पाकिस्तान में बहुसंख्यकों का सांप्रदायिकरण हुआ है और वहां के हालात आप देख ही रहे हैं. इसी तरह अगर भारत में बहुसंख्यकों का सांप्रदायिकरण होगा, तो इसके दुष्परिणामों से हमारे देश को बचाना आसान नहीं होगा.’

कांग्रेस के राज्यसभा सांसद ने इस दौरान यह भी कहा, ‘जवाहरलाल नेहरू का कथन था कि अल्पसंख्यकों की सांप्रदायिकता के मुकाबले बहुसंख्यकों की सांप्रदायिकता ज्यादा खतरनाक होती है.....सांप्रदायिकता का भूत जब तक बोतल में बंद है, बंद है. लेकिन इसके एक बार बाहर निकलने के बाद इसे दोबारा बोतल में डालना आसान नहीं है.’

उधर, भाजपा ने दिग्विजय सिंह के इस बयान पर कड़ी आपत्ति जतायी है. मध्य प्रदेश भाजपा प्रवक्ता उमेश शर्मा ने कहा, ‘भगोड़े इस्लामी प्रचारक जाकिर नाइक की भाषा बोलते हुए दिग्विजय हिंदुओं के खिलाफ सांप्रदायिक विषवमन कर रहे हैं.’

उन्होंने आगे कहा कि इसी मानसिकता के कारण ही दिग्विजय सिंह को लोकसभा चुनावों में भाजपा नेता साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के हाथों हार का सामना करना पड़ा था.