अयोध्या विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्षकारों ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय में कहा कि वे इस बात से इन्कार नहीं कर रहे हैं कि अयोध्या भगवान राम की जन्मभूमि है. लेकिन, मुस्लिम पक्षकारों ने यह भी कहा कि इस स्थल से जुड़े विवाद को सौहार्दपूर्ण ढंग से इसलिए नहीं सुलझाया जा सका क्योंकि हिंदू पक्ष का दावा है कि ध्वस्त मस्जिद का मध्य गुंबद ही वह स्थान है, जहां राम का जन्म हुआ था.

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ के समक्ष मुस्लिम पक्षकारों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन ने कहा कि इस बात पर कोई विवाद नहीं है कि अयोध्या भगवान राम की जन्मभूमि है. धवन ने कहा, ‘हम लोगों सहित कोई भी अयोध्या के भगवान राम का जन्मस्थान होने के बारे में मना नहीं कर रहा है. लंबे समय से चला आ रहा यह विवाद काफी पहले ही सुलझ गया होता, अगर दूसरे पक्ष ने यह स्वीकार कर लिया होता कि राम जन्मस्थान ठीक मध्य गुंबद के नीचे नहीं है. लेकिन, हिंदुओं ने जोर दिया कि राम जन्म मस्जिद के मध्य गुंबद के नीचे हुआ. वास्तविक विवाद यही है.’

वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने यह भी कहा कि धार्मिक बंदोबस्ती किसी के पक्ष में मालिकाना हक नहीं देती और जब मुगल बादशाह बाबर आया था तो यह एक बेकार भूमि थी और संपत्ति का कोई मालिक नहीं था. उन्होंने कहा कि छह दिसंबर 1992 को विवादित राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद स्थल पर मस्जिद गिराए जाने के साथ ही भारत की धर्मनिरपेक्षता और सहिष्णुता के बारे में विदेशों में धारणा बदल गई. मुस्लिम पक्ष ने उच्चतम न्यायालय में कहा कि यद्यपि मुसलमानों के खिलाफ दुश्मनी बढ़ायी जा रही है लेकिन अयोध्या ऐसी भूमि है जहां हिंदू और मुसलमान सदियों से साथ साथ रहते आए हैं.