अमेरिका ने चीन की 28 कंपनियों को काली सूची में डाला, अल्पसंख्यकों के साथ दुर्व्यवहार का आरोप

अमेरिका ने चीन की 28 कंपनियों को काली सूची में डाल दिया है. अमेरिका के वाणिज्य मंत्री विल्बर रॉस ने इस फैसले की घोषणा की. इससे ये कंपनियां अब अमेरिकी कंपनियों के साथ कारोबार नहीं कर सकेंगी. इन कंपनियों पर उइगर मुसलमानों सहित चीन के अन्य अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने और उनके साथ दुर्व्यवहार का आरोप है. विल्बर रॉस ने कहा कि अमेरिका अल्पसंख्यकों के क्रूर दमन को बर्दाश्त नहीं करेगा. इस्लाम को मानने वाले उइगर समुदाय के लोग चीन के सबसे बड़े और पश्चिमी क्षेत्र शिंजियांग प्रांत में रहते हैं. तुर्क मूल के उइगर मुसलमानों की इस क्षेत्र में आबादी एक करोड़ से ऊपर है. ये ‘ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट’ चला रहे हैं जिसका मकसद चीन से अलग होना है. चीन ने बड़ी संख्या में उइगर मुस्लिमों को हिरासत कैंपों में रखा हुआ है.

मोहन भागवत का बड़ा बयान, कहा - मॉब लिंचिंग की आड़ में देश को बदनाम करने की कोशिश

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने देश में बढ़ती मॉब लिंचिंग की घटनाओं को लेकर एक बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि हिंसा के ऐसे मामलों को जानबूझकर तूल दिया जाता है. मोहन भागवत ने कहा कि लिंचिंग की आड़ में एक षडयंत्र चल रहा है. उनका कहना था कि ये शब्द पश्चिमी समाज से आया है और देश को बदनाम करने के लिए भारत के संदर्भ में इसका इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए. मोहन भागवत ने ये बातें विजयदशमी के मौके पर नागपुर में स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहीं. संघ प्रमुख ने जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी करने के मोदी सरकार के फैसले का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि ये एक साहसिक कदम था जिसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की सराहना की जानी चाहिए.

इससे पहले मोहन भागवत ने विजयादशमी के मौके पर ‘शस्त्र पूजा’ की. दशहरे का त्यौहार सरसंघचालकों के लिए काफी मायने रखता है क्योंकि 1925 में इसी दिन संघ की स्थापना हुई थी

वायु सेना प्रमुख ने आतंकवाद से निपटने के सरकार के तरीके में बड़े बदलाव की बात कही

भारतीय वायु सेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया ने कहा है कि बालाकोट में हुआ हवाई हमला आतंकवाद के खिलाफ राजनीतिक नेतृत्व के संकल्प को दिखाता है. उनके मुताबिक आतंकवादी हमलों से निपटने के तरीके में यह एक बड़ा बदलाव है. उन्होंने ये बातें वायु सेना दिवस के मौके पर गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस में आयोजित एक कार्यक्रम में कहीं. वायु सेना प्रमुख ने पाकिस्तान के सुरक्षा हालात को चिंता की वजह भी बताया. उन्होंने कहा कि देश की रक्षा को चुनौती देने वाली किसी भी आकस्मिक घटना से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहने की आवश्यकता है. आरकेएस भदौरिया ने हाल ही में वायु सेना प्रमुख का पद संभाला है. इस साल 14 फरवरी को पुलवामा में हुए आतंकवादी हमले के बाद भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में हवाई हमले को अंजाम दिया था. एक ट्रेनिंग कैंप पर हुए इस हमले में बड़ी संख्या में आतंकी मारे गए थे.

अब नरेंद्र मोदी को शशि थरूर की चिट्ठी, कहा - मन की बात कहीं मौन की बात न बन जाए

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक खुली चिट्ठी लिखकर उन पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा है कि लोकतंत्र और संविधान नागरिकों को आलोचना करने का अधिकार देता है. शशि थरूर के मुताबिक ऐसे में किसी की आलोचना को देशद्रोह की तरह देखना और ऐसा करने वालों के खिलाफ मामला दर्ज करना गलत है. बीते जुलाई में चर्चित इतिहासकार रामचंद्र गुहा और फिल्मकार मणिरत्नम सहित 50 हस्तियों ने प्रधानमंत्री को खुली चिट्ठी लिखी थी. इसमें देश मे बढ़ती मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर चिंता जताई गई थी. कुछ दिन पहले ही बिहार के मुजफ्फरपुर में इन सभी के खिलाफ राजद्रोह का मामला दर्ज किया है. शशि थरूर के मुताबिक उन्हें उम्मीद है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का समर्थन करेंगे ताकि मन की बात कहीं मौन की बात न बन जाए.

संयुक्त राष्ट्र आर्थिक तंगी का शिकार

संयुक्त राष्ट्र आर्थिक तंगी से जूझ रहा है. इसके महासचिव एंटोनियो गुटेरेश ने कहा है कि इस महीने के आखिर तक संस्था के पास रखा पैसा पूरी तरह खत्म हो जाने की आशंका है. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सचिवालय में काम करने वाले करीब 37 हजार कर्मचारियों को एक चिट्ठी लिखी है. इसमें कहा गया है कि उनके वेतन-भत्तों और दूसरे खर्च में कटौती की जा सकती है. एंटोनियो गुटेरेश ने लिखा है कि इस साल संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों ने जरूरी बजट का केवल 70 प्रतिशत ही योगदान किया है. उन्होंने खर्च में कमी लाने के लिये सम्मेलनों और बैठकों को टालने और दूसरी सेवाओं में कटौती की बात भी कही है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने सदस्य देशों से इस साल की शुरूआत में संस्था की नकदी संबंधी समस्या दूर करने के लिये योगदान राशि बढ़ाने को कहा था. लेकिन इन देशों ने इससे इनकार कर दिया. पिछले साल संयुक्त राष्ट्र का बजट करीब 5.4 अरब डॉलर था.