आज तमिलनाडु के मामल्लापुरम (महाबलिपुरम) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच अनौपचारिक बैठक हो रही है. नरेंद्र मोदी तमिलनाडु पहुंच गए हैं. वे दिल्ली से एक विशेष विमान से यहां पहुंचे. चेन्नई एयरपोर्ट पर तमिलनाडु के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित और मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी ने उनका स्वागत किया. अब वे यहां से 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित तटीय शहर महाबलिपुरम जाएंगे. उधर, शी जिनपिंग आज दोपहर बाद यहां पहुंचेंगे.

दोनों हाई प्रोफाइल नेताओं के बीच यह दूसरी अनौपचारिक शिखर वार्ता होगी. पिछले साल नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच चीनी शहर वुहान में पहली अनौपचारिक शिखर वार्ता हुई थी. इस वार्ता का समापन शनिवार को होगा. इतने अहम आयोजन को देखते हुए महाबलिपुरम को खूबसूरती से सजाया गया है. सुरक्षा इंतजाम भी चाक चौबंद हैं. जगह-जगह सुरक्षाकर्मी तैनात हैं.

सवाल उठता है कि इस वार्ता के लिए महाबलिपुरम को कैसे चुना गया. इस बारे में अलग-अलग जानकारियां सामने आ रही हैं. कुछ खबरों के मुताबिक महाबलिपुरम का नाम चीन ने ही सुझाया था. सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि दो महीने पहले इस बैठक की जगह पर चर्चा हुई तो भारत में चीन के पूर्व राजदूत और मौजूदा उप विदेश मंत्री लु झाओहुई ने महाबलिपुरम का नाम सुझाया. बताया जाता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस बात के पक्षधर रहे हैं कि विदेशी राष्ट्राध्यक्षों को दिल्ली और मुंबई के अलावा भारत के और भी शहर दिखाए जाने चाहिए और चीन के इस सुझाव पर वे फौरन सहमत हो गए.

कुछ जानकारों के मुताबिक झाओहुई चीन के मशहूर विद्वान शु फंचेंग के शिष्य रहे हैं और इसलिए वे महाबलिपुरम के ऐतिहासिक महत्व से वाकिफ रहे होंगे. इतिहास बताता है कि दूसरी और तीसरी सदी में चीन के तत्कालीन शासकों ने पूरे दक्षिण भारत पर राज करने वाले पल्लव वंश के राजाओं के साथ संभवत: दुनिया का पहला रणनीतिक समझौता किया था. इसमें चीन की सुरक्षा की जिम्मेदारी इन राजाओं को सौंपी गई थी. इसके बदले चीन के शासकों ने पल्लव वंश के राजाओं के शासन का दायरा दक्षिण-पूर्वी एशिया में फैलाने में मदद की. मशहूर चीनी यात्री ह्वेनसांग के भी महाबलिपुरम आने का जिक्र मिलता है.

लेकिन बात सिर्फ इतिहास की नहीं है. कई जानकारों के मुताबिक मोदी-शी की बैठक के लिए महाबलिपुरम का चयन भाजपा की मौजूदा राजनीतिक बाध्यताओं से भी जुड़ता है. तमिलनाडु अभी तक केंद्र में सत्ताधारी पार्टी की पहुंच से दूर रहा है. इस अहम आयोजन के जरिये भाजपा तमिलनाडु में अपनी पैठ बढ़ाना चाहती है. जैसा कि एक साक्षात्कार में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव पी मुरलीधर राव कहते हैं, ‘भाजपा के बारे में धारणा है कि ये एक हिंदी पार्टी है. मोदी के तमिलनाडु दौरों में इजाफों से यह समझ बढ़ेगी कि ये सूबा हमारे लिए राजनीतिक तौर पर बहुत महत्वपूर्ण है.’

बीबीसी से बातचीत में वरिष्ठ पत्रकार आरके राधाकृष्णन भी कहते हैं, ‘यह राजनीति है. बीजेपी तमिलनाडु के लोगों को आकर्षित करना चाहती है. यह सिर्फ उसी का एक हिस्सा है. प्रधानमंत्री तमिल में बोल रहे हैं और वे जहां भी जाते हैं तमिल की प्रशंसा करते हैं.’