तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन ने कहा है कि उनका देश उत्तरी सीरिया के कथित कुर्द चरमपंथियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं रोकेगा. उन्होंने यह कार्रवाई रोकने की अन्य देशों की मांग को ‘धमकी’ करार देते हुए इसे सिरे से खारिज कर दिया. पीटीआई के मुताबिक इस्तांबुल में दिए एक भाषण में रजब तैयब एर्दोआन ने कहा, ‘ये कोई मायने नहीं रखता कि लोग क्या कह रहे हैं, हम नहीं रुकेंगे.’

तुर्की की सेना की तरफ से पूर्वोत्तर सीरिया पर किए जा रहे हवाई हमलों और गोलाबारी के चलते हजारों की तादाद में आम नागरिक इस इलाके से पलायन करने पर मजबूर हो गए हैं. इससे वहां मानवीय संकट गहराने की आशंका प्रबल हो गई है. संयुक्त राष्ट्र ने अनुमान लगाया है कि बुधवार को कुर्द ठिकानों के खिलाफ चलाए गए तुर्की के अभियान के बाद से 70,000 लोग विस्थपित हुए हैं. सीरियाई कुर्द तुर्की के इस हमले का प्रतिरोध कर रहे हैं.

तुर्की के इस कदम की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निंदा हो रही है. संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख एंटोनियो गुटेरेश ने हिंसा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है. यूरोप के कई देशों ने तुर्की से कहा है कि वह एकतरफा सैन्य कार्रवाई रोक दे. भारत ने भी तुर्की से कहा है कि वह सीरिया की संप्रभुता का सम्मान करे.

उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन को सीरिया में हमले की इजाजत देने को सही ठहराने का प्रयास किया है. लेकिन इसे कभी अमेरिका के करीबी सहयोगी रहे कुर्दों के प्रति उनके विश्वासघात के रूप में देखा जा रहा है. हालांकि अब डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उनका देश तुर्की और कुर्द समूहों के बीच मध्यस्थता कर सकता है.

तुर्की, कुर्दों को आतंकवादी मानता है. वह सीरिया में उनके खिलाफ सैन्य कार्रवाई की लंबे समय से योजना बना रहा था. तुर्की का कहना है कि सीरियाई कुर्द, कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी (पीकेके) के अहम सहयोगी हैं. पीकेके ने 1984 में तुर्की के खिलाफ बगावत की थी और उससे लड़ाई लड़ी थी जिसमें काफी खून-खराबा हुआ था. पीकेके अभी भी आए दिन तुर्की में हमलों को अंजाम देती है.