आर्थिक मंदी के हालात के बीच भारत को विश्व बैंक से झटका लगा है. संस्था ने अब चालू वित्त वर्ष में भारत की विकास दर का अनुमान घटा दिया है. विश्व बैंक ने इसे छह फ़ीसदी कर दिया है. इससे पहले अप्रैल में उसने इसे 7.5 प्रतिशत बताया था.

हालांकि, दक्षिण एशिया आर्थिक फोकस के ताजा संस्करण में विश्व बैंक ने यह भी कहा कि मुद्रास्फीति अनुकूल है और यदि मौद्रिक रुख नरम बना रहा तो वृद्धि दर धीरे-धीरे सुधर कर 2020-21 में 6.9 फीसदी और 2021-22 में 7.2 फीसदी हो जाने का अनुमान है.

पीटीआई के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक की संयुक्त वार्षिक बैठक से पहले जारी इस रिपोर्ट में लगातार दूसरे साल भारत की आर्थिक वृद्धि दर में गिरावट का अनुमान व्यक्त किया गया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि 2019-20 की पहली तिमाही में मांग के मामले में निजी खपत में गिरावट और उद्योग एवं सेवा दोनों में वृद्धि कमजोर होने से अर्थव्यवस्था में सुस्ती रही. 2018-19 में चालू खाता घाटा बढ़कर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 2.1 प्रतिशत हो गया. एक साल पहले यह 1.8 प्रतिशत रहा था. इससे बिगड़ते व्यापार संतुलन का पता चलता है.

रिपोर्ट के अनुसार भारत में गरीबी में कमी जारी है, लेकिन अब इसकी रफ्तार सुस्त हो गयी है. विश्व बैंक के मुताबिक भारत में ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुस्ती, जीएसटी, नोटबंदी और शहरों में बढ़ी बेरोजगारी दर ने गरीब परिवारों की समस्याएं बढ़ा दी हैं. उसका यह भी कहना है कि प्रभावी कॉरपोरेट कर की दर में हालिया कटौती से कंपनियों को मध्यम अवधि में लाभ होगा, लेकिन वित्तीय क्षेत्र में दिक्कतें सामने आती रहेंगी.