राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने केंद्र तथा अन्य एजेंसियों को निर्देश दिया है कि वे पानी की बोतलों और थैलियों पर तीन महीने में प्रतिबंध लगाएं. एनजीटी के अनुसार ये सामान अच्छी खासी मात्रा में प्लास्टिक कचरा पैदा करते हैं.

पीटीआई के मुताबिक एनजीटी के अध्यक्ष आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, ‘विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के आधार पर पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय, भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण तथा अन्य संबंधित एजेंसियों को कानून के अनुसार तीन महीने के भीतर यह कार्रवाई करनी चाहिए.’

एनजीटी की विशेषज्ञ समिति द्वारा हाल में सौंपी गई एक रिपोर्ट में कहा गया है, ‘एक बार में इस्तेमाल होने वाली प्लास्टिक से बनी पानी की छोटी बोतलों, थैलियों और कपों जैसे छोटे आकार वाले पैकेटों के हल्का, पोर्टेबल और सस्ता होने के कारण कम आय वाली आबादी इन्हें अभी भी काफी इस्तेमाल कर रही है...काफी विचार-विमर्श के बाद यह निष्कर्ष निकला है कि इन्हें तुरंत बंद किया जाना चाहिए क्योंकि इनसे अच्छी खासी मात्रा में प्लास्टिक का कचरा पैदा होता है.’

रिपोर्ट में आगे यह भी कहा गया है, ‘सभी नगर निगमों को खुद से या प्लास्टिक कचरा प्रबंधन नियमों में उल्लेखित एजेंसियों के जरिए प्लास्टिक के कचरे को अलग करने, उन्हें इकट्ठा और इनका निस्तारण करने की जिम्मेदारी दी जानी चाहिए.’

एनजीटी ने बीते मई में इस विशेषज्ञ समिति का गठन यह जानने के लिए किया था कि क्या खाद्य उत्पादों की प्लास्टिक पैकेजिंग को रोकने के लिए और अधिक नियम बनाने की जरूरत है. एनजीटी इस समय ‘हिम जागृति उत्तरांचल वेलफेयर सोसायटी’ नाम की एक एनजीओ की याचिका पर सुनवाई कर रहा है. इस याचिका में ही प्लास्टिक की बोतलों और थैलियों के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग की गई है.