अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पूर्वोत्तर सीरिया में तुर्की की सैन्य कार्रवाई के विरोध में उसके खिलाफ नए प्रतिबंधों की घोषणा की है. उन्होंने कहा, ‘अगर तुर्की के नेताओं ने खतरनाक और विनाशकारी मार्ग पर चलना जारी रखा तो मैं उसकी अर्थव्यवस्था को तेजी से बर्बाद करने को पूरी तरह तैयार हूं.’ डोनाल्ड ट्रंप का यह भी कहना था कि अगर तुर्की ने कुर्दों के खिलाफ अपनी कार्रवाई बंद नहीं की तो अमेरिका तुर्की से 100 अरब डॉलर के व्यापार सौदे पर बातचीत भी तत्काल बंद कर देगा. उन्होंने कहा कि तुर्की की सैन्य कार्रवाई आम नागरिकों को खतरे में डाल रही है और क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता को खतरा पहुंचा रही है.

अमेरिका तुर्की के रक्षा मंत्री हुलसी अकार, आंतरिक मंत्री सुलेमान सोयलू और ऊर्जा मंत्री फातिह डोनमेज़ को अपनी प्रतिबंध सूची में पहले ही डाल चुका है. डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की अध्यक्ष नैन्सी पेलोसी को भेजे एक पत्र में तुर्की मामले को एक राष्ट्रीय आपदा बताया है. अमेरिका के सीरिया से अपने सैनिकों को वापस बुलाने के फैसले के बाद तुर्की ने बुधवार को सीमा पर कुर्द लड़ाकों पर हमला किया था. अमेरिका के इस कदम की डोनाल्ड ट्रंप की अपनी रिपब्लिक पार्टी ने भी निंदा की थी. कुछ नेताओं ने इसे आईएस के खिलाफ लड़ाई में अमेरिका के सहयोगी रहे कुर्दों के साथ धोखा बताया था.

तुर्की की सेना की तरफ से पूर्वोत्तर सीरिया पर किए जा रहे हवाई हमलों और गोलाबारी के चलते हजारों की तादाद में आम नागरिक इस इलाके से पलायन करने पर मजबूर हो गए हैं. इससे वहां मानवीय संकट गहराने की आशंका प्रबल हो गई है. संयुक्त राष्ट्र ने अनुमान लगाया है कि बीते बुधवार को कुर्द ठिकानों के खिलाफ चलाए गए तुर्की के अभियान के बाद से 70,000 लोग विस्थपित हुए हैं. सीरियाई कुर्द तुर्की के इस हमले का प्रतिरोध कर रहे हैं.

तुर्की के इस कदम की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निंदा हो रही है. संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख एंटोनियो गुटेरेश ने हिंसा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है. यूरोप के कई देशों ने तुर्की से कहा है कि वह एकतरफा सैन्य कार्रवाई रोक दे. भारत ने भी तुर्की से कहा है कि वह सीरिया की संप्रभुता का सम्मान करे.

तुर्की, कुर्दों को आतंकवादी मानता है. वह सीरिया में उनके खिलाफ सैन्य कार्रवाई की लंबे समय से योजना बना रहा था. तुर्की का कहना है कि सीरियाई कुर्द, कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी (पीकेके) के अहम सहयोगी हैं. पीकेके ने 1984 में तुर्की के खिलाफ बगावत की थी और उससे लड़ाई लड़ी थी जिसमें काफी खून-खराबा हुआ था. पीकेके अभी भी आए दिन तुर्की में हमलों को अंजाम देती है.