वैश्विक भूख सूचकांक यानी ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत की स्थिति और खराब हुई है. खबरों के मुताबिक 117 देशों की इस सूची में वह 102वें स्थान पर आ गया है. 2010 में भारत इस सूची में 95वें पायदान पर था. 2015 में उसकी रैंकिंग सुधरी और वह 93वें पायदान पर आया. लेकिन ताजा रैकिंग बताती है कि भारत में ऐसे लोगों की संख्या बढ़ी है जिन्हें पेट भर और पर्याप्त पोषण वाला खाना नहीं मिल पा रहा. इससे यह भी संकेत मिलता है कि देश में बाल मृत्यु दर ज्यादा है.

दिलचस्प बात यह है कि एशिया की तीसरी और दक्षिण एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भारत ग्लोबल हंगर इंडेक्स में दक्षिण एशिया में भी सबसे नीचे है. यानी पोषक आहार की उपलब्धता के मामले में पाकिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश भी उससे आगे हैं. पाकिस्तान इस सूची में 94वें स्थान पर है जबकि बांग्लादेश 88, नेपाल 73 और श्रीलंका 66वें स्थान पर है. भारत ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, इंडिया, चीन और साउथ अफ्रीका) के बाकी देशों से भी बहुत पीछे है. ब्रिक्स देशों में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला दक्षिण अफ्रीका 59वें स्थान पर है.

ग्लोबल हंगर इंडेक्स को आयरलैंड की एड एजेंसी कंसर्न वर्ल्डवाइड और जर्मन संस्था वेल्ट हुंगर तैयार करते हैं. इसे तैयार करने के लिए विभिन्न देशों में कुपोषित बच्चों की आबादी, उनमें लंबाई के अनुपात में कम वजन या उम्र के अनुपात में कम लंबाई वाले पांच वर्ष तक के बच्चों का प्रतिशत और पांच वर्ष तक के बच्चे की मृत्यु दर जैसे आंकड़े लिए जाते हैं. ताजा सूची में बेलारूस, यूक्रेन, तुर्की, क्यूबा और कुवैत अव्वल हैं. रवांडा और इथियोपिया जैसे देशों की रैंकिंग भी सुधरी है.