भारत के सरकारी बैंकों का सबसे खराब दौर तब था जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन थे. यह दावा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने किया है. उन्होंने यह बात अमेरिका में कोलंबिया यूनिवर्सिटी के एक आयोजन में कही. वित्त मंत्री का यह भी कहना था कि आज सरकारी बैंकों को बचाना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है. निर्मला सीतारमण ने कहा, ‘मैं एक विद्वान के तौर पर रघुराम राजन की बहुत इज्जत करती हूं जिन्होंने ऐसे समय पर भारत के केंद्रीय बैंक का गवर्नर होना स्वीकार किया जब भारतीय अर्थव्यवस्था अपने अच्छे दौर में थी.’

रघुराम राजन ने कुछ समय पहले कहा था कि अपने पहले कार्यकाल में अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर नरेंद्र मोदी सरकार का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा क्योंकि नेतृत्व कुछ ज्यादा ही व्यक्ति केंद्रित हो गया था और उसके पास आर्थिक विकास के एजेंडे को लेकर साफ समझ ही नहीं थी. जब निर्मला सीतारमण से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इसके उलट रघुराम राजन के रिजर्व बैंक का गवर्नर रहते हुए काम ठीक से नहीं हुआ. उनका कहना था, ‘राजन के रिजर्व बैंक का गवर्नर रहते हुए कर्ज नेताओं के फोन कॉल पर ही दे दिए जाते थे.’

निर्मला सीतारमण के मुताबिक इससे हुए नुकसान से उबरने के लिए सरकार को अब बैंकों में पूंजी डालनी पड़ रही है. उन्होंने कहा, ‘डॉ सिंह प्रधानमंत्री थे और मुझे यकीन है कि डॉ राजन इस बात से सहमत होंगे कि डॉ सिंह के पास भारत को लेकर एक साफ एजेंडा था.’ उन्होंने कहा कि इन बातों का मकसद किसी का मजाक उड़ाना नहीं बल्कि तथ्य सामने रखना है.