उच्चतम न्यायालय ने राजनीतिक रूप से संवेदनशील अयोध्या विवाद के मामले की सुनवाई बुधवार को पूरी कर ली. प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अगुवाई वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने इस मामले की 40 दिन की सुनवाई के दौरान सभी पक्षों की दलीलें सुनीं. सुप्रीम कोर्ट इस मामले में फैसला बाद में सुनाएगा.

बुधवार सुबह सुनवाई शुरू होने पर ही सुप्रीम पीठ ने कह दिया था कि वह पिछले 39 दिनों से अयोध्या भूमि विवाद मामले में सुनवाई कर रही है और किसी भी पक्षकार को आज (बुधवार) के बाद अब और समय नहीं दिया जाएगा. न्यायालय ने पहले कहा था कि सुनवाई 17 अक्टूबर को पूरी हो जाएगी. बाद में इस समय सीमा को एक दिन पहले कर दिया गया. प्रधान न्यायाधीश का कार्यकाल 17 नवंबर को समाप्त हो रहा है. इस पीठ में न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर भी शामिल हैं.

पीठ ने अयोध्या भूमि विवाद मामले में संबंधित पक्षों को ‘मोल्डिंग ऑफ रिलीफ’ (राहत में बदलाव) के मुद्दे पर लिखित दलील दाखिल करने के लिये तीन दिन का समय दिया है. सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ अयोध्या में 2.77 एकड़ विवादित भूमि को तीन पक्षकारों-सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला के बीच बराबर-बराबर बांटने का आदेश देने संबंधी इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सितंबर, 2010 के फैसले के खिलाफ दायर 14 अपीलों पर सुनवाई कर रही थी.