पांच साल पहले 2014 में जब महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव हो रहे थे, उस वक्त देवेंद्र फडणवीस भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर काम कर रहे थे. शिव सेना के साथ जब भाजपा का गठबंधन टूट गया और दोनों अलग-अलग चुनाव लड़े तो माना जा रहा था कि इससे भाजपा और शिवसेना दोनों को काफी नुकसान होगा. जब चुनावों के नतीजे आए तो भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. हालांकि अभी भी उसे सरकार बनाने के लिए किसी और दल के समर्थन की जरूरत है. इसके बाद भाजपा की पुरानी सहयोगी शिव सेना फिर से उसके साथ आ गई.

अब भाजपा के अंदर इस बात को लेकर माथापच्ची चल रही थी कि महाराष्ट्र का अगला मुख्यमंत्री कौन बनेगा. केंद्रीय मंत्री और महाराष्ट्र में भाजपा के सबसे ताकतवर नेता माने जाने वाले नितिन गडकरी के बारे में कहा जा रहा था कि उनकी भी इच्छा राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर काम करने की है. हालांकि, गडकरी सार्वजनिक तौर पर इसे खारिज करते रहे. महाराष्ट्र भाजपा में प्रदेश स्तर के एक और ताकतवर नेता एकनाथ खड़से को भी मुख्यमंत्री पद का दावेदार माना जा रहा था. बहुत से लोगों को यह लग रहा था कि अगर किसी वजह से केंद्रीय नेतृत्व ने गडकरी के पक्ष में निर्णय नहीं लिया तो खड़से मुख्यमंत्री बनाए जाएंगे.

लेकिन हर किसी को तब हैरानी हुई जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने देवेंद्र फडणवीस को महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनाने का निर्णय लिया. उस वक्त फडणवीस सिर्फ 44 साल के थे. इसके बाद महाराष्ट्र के इतिहास में वे सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री बन गए. उनके मुख्यमंत्री बनने पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आईं. अधिकांश लोगों ने यह कहा कि फडणवीस का अपना कोई जनाधार नहीं है और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के तौर पर एक ऐसा नेता चाहिए था जो उनकी हर बात माने, इसी वजह से गडकरी जैसे वरिष्ठ नेता को दरकिनार करके फडणवीस को मुख्यमंत्री बनाया गया. लोग मान रहे थे कि फडणवीस जनाधार के मामले में कमजोर हैं और इसका लाभ ही उन्हें मिला है.

लेकिन इस बार के महाराष्ट्र चुनावों को देखकर लगता है कि प्रदेश में भाजपा की राजनीति इन पांच सालों में पूरी तरह से बदल गई है. पांच साल पहले देवेंद्र फडणवीस अपेक्षाकृत जूनियर माने जाते थे. लेकिन इस बार के चुनावों से यह स्पष्ट है कि अब वे महाराष्ट्र में भाजपा के सबसे ताकतवर नेता हो गए हैं. भाजपा की राजनीति में नरेंद्र मोदी के उभार के बाद से भाजपा हर चुनाव मोदी के नाम पर ही लड़ती है. लेकिन यहां के चुनाव में फडणवीस का चेहरा भी पार्टी आगे रख रही है और प्रदेश की राजनीति को समझने वाले लोग मान रहे हैं कि पार्टी को इसका फायदा भी मिल रहा है.

अब सवाल यह उठता है कि आखिर इन पांच सालों में ऐसा क्या हुआ कि फडणवीस महाराष्ट्र भाजपा के सबसे ताकतवर नेता के तौर पर दिखने लगे. इसमें निश्चित तौर पर एक वजह उनका मुख्यमंत्री होना है. लेकिन और भी कई वजहें हैं. इस बारे में महाराष्ट्र भाजपा के एक नेता कहते हैं, ‘फडणवीस का स्वभाव उन्हें राजनीति में यहां तक लेकर आया है. पार्टी के राष्ट्रीय नेताओं की नजर में उन्होंने बहुत ईमानदारी से काम करने वाले नेता की छवि बनाई है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में भी उन्होंने अपनी सरलता से पदाधिकारियों का दिल जीता है. सर संघ प्रमुख मोहन भागवत सार्वजनिक तौर पर फडणवीस की तारीफ करते हैं. अपने से जूनियर नेताओं और विधायकों से भी वे बेहद सरलता से मिलते हैं. स्वभाव की वजह से संगठन में और संगठन के बाहर भी उनके प्रति एक सकारात्मक माहौल बना है.’

कभी महाराष्ट्र में भाजपा का काम देखने वाले भाजपा के एक राष्ट्रीय पदाधिकारी इस बारे में बताते हैं, ‘फडणवीस ने संगठन में अपने विरोधियों से बहुत चतुराई से अच्छे संबंध बनाए. प्रदेश में जो भी उनके प्रतिस्पर्धी हो सकते थे, उन सभी लोगों को न सिर्फ सार्वजनिक तौर पर फडणवीस ने बहुत सम्मान दिया बल्कि वे जो भी कहते गए, उनमें से सभी वाजिब काम फडणवीस करते गए. इससे फडणवीस के प्रतिस्पर्धियों के समर्थकों में फडणवीस के प्रति सकारात्मक सोच विकसित हुई और वे लोग उनके साथ खड़े होने लगे.’

भाजपा की राजनीति में ऐसे नेता भी हैं जो मुख्यमंत्री के पद पर तो रहे हैं लेकिन अब तक उनकी खुद की कोई खास राजनीतिक जमीन तैयार नहीं हो पाई है. लेकिन देवेंद्र फडणवीस ने अपने कामकाज से प्रदेश के लोगों के बीच अपना एक जना​धा​र विकसित किया है. इस बारे में महाराष्ट्र प्रदेश भाजपा के एक नेता कहते हैं, ‘इन पांच सालों में देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र के लोगों के भले के लिए न सिर्फ कई महत्वपूर्ण काम किए बल्कि इन्हें सही ढंग से लोगों के बीच पहुंचाया भी. मराठा आरक्षण जैसे मुद्दों पर भी फडणवीस ने जिस सूझ-बूझ से काम लिया, उससे भी उनके प्रति सकारात्मक माहौल बना. बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में कई बड़ी परियोजनाओं पर उनकी सरकार ने काम किया. किसानों के लिए उन्होंने कई काम किए. इससे आम लोगों में देवेंद्र फडणवीस राजनीति तौर पर मजबूत हुए.’

वे आगे कहते हैं, ‘फडणवीस की खासियत यह है कि मुंबई जैसे शहर में पारंपरिक तौर पर कांग्रेस समर्थक रहे लोग भी उनके प्रति सकारात्मक भाव रखते हैं. मुंबई आधुनिक जीवन मूल्यों वाला शहर है. इसलिए आप देखेंगे कि फडणवीस ने उस तरह की सोच नहीं दिखाई जिस तरह की भाजपा के कुछ अन्य मुख्यमंत्री दिखाते हैं. बल्कि फडणवीस ने भाजपा का मुख्यमंत्री होने के बावजूद अपनी एक उदार छवि गढ़ी. इससे मुंबई जैसे शहर के प्रभावी लोग भाजपा के साथ जुड़े. इन्हीं वजहों से आज देवेंद्र फडणवीस प्रदेश भाजपा में सबसे मजबूत दिखते हैं. शिव सेना जैसी सहयोगी के साथ गठबंधन चलाकर उन्होंने यह ​भी दिखाया कि राजनीतिक सूझ-बूझ के मामले में भी वे बेहद परिपक्व हैं.’

यही वजह है कि इस बार के महाराष्ट्र चुनावों में भाजपा जिस तरह से नरेंद्र मोदी के नाम पर वोट मांग रही है, उसी तरह से देवेंद्र फडणवीस के नाम पर भी वोट मांगे जा रहे हैं. नितिन गडकरी अब भी महाराष्ट्र भाजपा के सबसे वरिष्ठ नेता हैं लेकिन संघ के नजदीक होने से जो ताकत उन्हें मिलती रही है वह देवेंद्र फडणवीस के पास भी है.