दूरसंचार कंपनी रिलायंस जियो ने प्रतिस्पर्धी कंपनी भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया लिमिटेड के ऊपर लैंडलाइन नंबरों को मोबाइल नंबर बताकर धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया है. जियो ने भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) को पत्र लिखकर दोनों प्रतिस्पर्धी कंपनियों पर जुर्माना लगाने की मांग की है.

रिलायंस जियो ने ट्राई को लिखे पत्र में कहा है कि दोनों प्रतिस्पर्धी कंपनियां ने अपने कॉरपोरेट उपभोक्ताओं को हेल्पलाइन नंबरों के लिये दिये गए लैंडलाइन नंबरों को मोबाइल नंबर बताकर सरकारी खजाने को चूना लगाया है. इससे जियो को भी सैंकड़ो करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. जियो ने कहा कि ऐसा करने से दोनों प्रतिस्पर्धी कंपनियों को गलत तरीके से कमायी हुई है. जियो ने मांग की इसको लेकर इन दोनों कंपनियों पर कार्रवाई की जाए.

इंटरकनेक्ट यूजेज चार्जेज के नियम के तहत किसी मोबाइल कंपनी का ग्राहक जब किसी दूसरी कंपनी के मोबाइल नेटवर्क पर कॉल करता है तो जिस नेटवर्क से कॉल जाती है उसे दूसरे नेटवर्क वाली कंपनी को एक तय रकम चुकानी पड़ती है. जियो का कहना है कि इसके लिए आइडिया और एयरटेल ने मोबाइल नंबरों के अलावा लैंडलाइन नंबरों पर की जानी वाली कॉल के पैसे भी उससे वसूले जो कि गलत है.

जियो ने अपने ग्राहकों के लिए पहले अपनी वॉयस काल फ्री कर रखी थी. लेकिन, हॉल ही में उसने कहा है कि जियो के अतिरिक्त दूसरे नेटवर्क पर फोन करने पर उसके ग्राहकों को छह पैसे प्रति मिनट देने होंगे. पहले कहा जा रहा था कि ट्राई इंटरकनेक्ट यूजेज चार्जेज को जल्द ही खत्म कर सकता है. रिलायंस जियो इसके समर्थन में है. लेकिन, हाल ही में ऐसी खबरें आई हैं कि मौजूदा हालात को देखते हुए इंटरकनेक्ट यूजेज चार्जेज को जारी रखा जा सकता है. इसके बाद ही रिलायंस जियो ने अपने ग्राहकों से दूसरे नेटवर्क पर कॉल के लिए पैसे वसूलने का फैसला किया था.

हालांकि, भारती एयरटेल ने पलटवार करते हुए कहा कि एक नेटवर्क से दूसरे नेटवर्क पर जा रहे कॉल को जोड़ने वाले शुल्क (इंटरकनेक्ट यूजेज चार्जेज) को लेकर परामर्श से पहले जियो ट्राई को बरगलाने की कोशिश कर रही है. वोडाफोन आइडिया ने जियो के इस नये आरोप पर फिलहाल प्रतिक्रिया नहीं दी है.