पाकिस्तान आतंकी फंडिंग रोकने के लिए गठित अंतरराष्ट्रीय एजेंसी फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स यानी एफएटीएफ की फांस से फिलहाल बच गया है. पेरिस में हो रही इस संस्था की बैठक में फैसला हुआ है कि उसे फरवरी, 2020 तक ग्रे लिस्ट यानी निगरानी वाले राष्ट्रों की सूची में ही बनाए रखा जाएगा. यानी उसे तब तक आतंकी फंडिंग पर प्रभावी कार्रवाई करनी है और अगर ऐसा नहीं हुआ तो उसे काली सूची में डाल दिया जाएगा. इसका मतलब होगा कि वैश्विक वित्तीय एजेंसियों से उसे पैसा मिलना बहुत मुश्किल हो जाएगा. फिलहाल एफएटीएफ की काली सूची में उत्तर कोरिया और ईरान ही हैं.

पेरिस में हुई एफएटीएफ की इस बैठक में 205 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए थे. इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ), विश्व बैंक, संयुक्त राष्ट्र और कई दूसरी संस्थाओं ने भी इसमें भागीदारी की थी. भारत और कुछ दूसरे सदस्य देशों ने इसमें पाकिस्तान पर आरोप लगाया कि वह हाफिज सईद, मौलाना मसूद अजहर और संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित दूसरे आतंकियों पर कोई ठोस कार्रवाई करने में नाकाम रहा है.

इससे पहले बताया जा रहा था कि एफएटीएफ के तीन महत्वपूर्ण सदस्य चीन, तुर्की और मलेशिया पाकिस्तान की मदद के लिए तैयार हैं. यही नहीं, अमेरिका समेत कुछ अन्य देश भी कई वजहों से नहीं चाहते कि पाकिस्तान पर प्रतिबंध लगे. उनके मुताबिक उसे एफएटीएफ की काली सूची में डाले जाने का मतलब होगा कि उसकी अर्थव्यवस्था और बदहाल हो जाएगी. इसका उल्टा असर भी पड़ सकता है और आतंकी संगठनों की जड़ें भी मजबूत हो सकती हैं.