राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद को लेकर कुछ मुस्लिम पक्षों ने कहा है कि अगर सुप्रीम कोर्ट का फैसला उनके पक्ष में आया तो सौहार्द बनाए रखने के लिए अयोध्या में विवादित जमीन पर मस्जिद निर्माण में विलंब किया जाना चाहिए. कुछ पक्षकारों का यह भी कहना है कि अगर फैसला मुस्लिमों के पक्ष में आता है तो उन्हें जमीन घेरकर छोड़ देनी चाहिए, लेकिन दोबारा मस्जिद तामीर नहीं करनी चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट में इस मुकदमे के एक वादी हाजी महबूब ने कहा कि देश की हालत को देखते हुए पहली प्राथमिकता सौहार्द बनाए रखना होना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘अगर फैसला मुस्लिमों के पक्ष में आता है तो शांति एवं सौहार्द के लिए हमें विवादित जमीन पर मस्जिद नहीं बनाना चाहिए, हमें इसके आसपास दीवार खड़ी कर छोड़ देना चाहिए.’ उन्होंने यह भी कहा, ‘यह मेरा निजी विचार है, मैं जो सोच रहा हूं वह देश की वर्तमान स्थिति को देखते हुए किया जाना चाहिए. मैं इस प्रस्ताव पर अन्य वादियों से भी चर्चा करूंगा.’ एक अन्य वादी मुफ्ती हसबुल्ला बादशाह खान भी महबूब से सहमत हैं. बादशाह खान जमीयत उलेमा ए हिंद अयोध्या के स्थानीय अध्यक्ष हैं. उन्होंने कहा, ‘यह सही है कि हम सांप्रदायिक सौहार्द का ख्याल रखें. वर्तमान परिदृश्य में अगर फैसला पक्ष में आता है तो हमें मस्जिद का निर्माण रोक देना चाहिए.’ मामले में एक और वादी मोहम्मद उमर ने कहा कि वह भी निर्माण रोके जाने पर सहमत हैं. हालांकि, मुख्य मुस्लिम वादी इकबाल अंसारी ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन सद्भाव बनाए रखने की बात उन्होंने भी कही.

अयोध्या में दशकों पुराने मंदिर- मस्जिद विवाद मामले में उच्चतम न्यायालय में 40 दिनों तक चली सुनवाई बुधवार को समाप्त हो गई जो इतिहास में दूसरी सबसे बड़ी कार्यवाही थी. उच्चतम न्यायालय ने राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया है और एक महीने के अंदर फैसला सुनाए जाने की उम्मीद है.