पिछले दिनों अमेरिका ने सीरिया से लगती तुर्की की सीमा से अपने सैनिकों को हटाने का ऐलान किया. इसके अगले ही दिन अमेरिकी सेना ने यह इलाका खाली कर दिया और इसके तुरंत बाद ही तुर्की ने सीरियाई कुर्दों पर धावा बोल दिया. सीरिया की उत्तरी सीमा के नजदीक कुर्दों के नेतृत्व वाले सीरियन डेमोक्रेटिक गठबंधन (एसडीएफ) के खिलाफ उसकी कार्रवाई में बड़े नुकसान की खबर आई. करीब एक लाख लोगों के पलायन की नौबत आन पड़ी. भारत समेत दुनिया भर के देशों ने तुर्की से सैन्य कार्रवाई रोकने की अपील की. लेकिन वहां के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन ने इसे खारिज कर दिया. उन्होंने कहा, ‘ये कोई मायने नहीं रखता कि लोग क्या कह रहे हैं, अब किसी कीमत पर हम नहीं रुकेंगे.’

उधर, सीरिया से सेना वापस बुलाने के अपने फैसले को लेकर आलोचना झेल रहे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उपराष्ट्रपति माइक पेंस और विदेश मंत्री माइक पोंपियो को तुर्की भेजा. इन दोनों ने तुर्की के साथ एक समझौता किया. इसके तहत तुर्की इस बात पर सहमत हुआ कि वह अगले पांच दिन यानी 22 अक्टूबर तक सीरिया में कुर्दों पर कोई हमला नहीं करेगा. अमेरिका की तरफ से कहा गया कि इन पांच दिनों में कुर्द तुर्की से लगते सीरियाई इलाकों को खाली कर देंगे.

अमेरिका ने यह भी कहा कि पांच दिनों तक अमेरिका तुर्की पर कोई नए प्रतिबंध नहीं लगाएगा और इसके बाद जब कुर्द सीमाई इलाकों से चले जाएंगे और तुर्की पूर्ण संघर्षविराम के तहत अपनी सेना को सीरियाई क्षेत्रों से वापस बुला लेगा, तब अमेरिका उस पर से पुराने प्रतिबंध भी हटा लेगा. इस समझौते के बाद तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन ने कुर्दों के नेतृत्व वाले सीरियन डेमोक्रेटिक गठबंधन (एसडीएफ) को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर वे पांच दिनों में सीरिया के सीमाई इलाके से नहीं हटे तो तुर्की और बड़ा सैन्य अभियान शुरू कर उन्हें खदेड़ देगा.

अमेरिका द्वारा किए गए इस समझौते को डोनाल्ड ट्रंप और उनके सहयोगी बड़ी सफलता बता रहे हैं. उनका कहना है कि उन्होंने सही समय पर यह समझौता करके हजारों कुर्दों को मरने से बचाया है. लेकिन अमेरिका के ही कई पूर्व, वर्तमान अधिकारी और विशेषज्ञ ऐसा नहीं मानते. इनके मुताबिक यह समझौता अमेरिका की नहीं बल्कि तुर्की की जीत है क्योंकि तुर्की जो चाहता था इस समझौते ने उसे वही सब दे दिया है.

क्यों यह समझौता तुर्की की जीत है और कुर्दों के साथ अन्याय करने जैसा है

तुर्की और कुर्दों की दुश्मनी काफी पुरानी है. वह कुर्दों को आतंकवादी मानता है. उसका कहना है कि सीरिया में आईएस से लड़ रहे एसडीएफ गठबंधन में शामिल सशस्त्र कुर्दिश पीपल्स प्रोटेक्शन यूनिट (वाईपीजी) एक आतंकी संगठन है, जो तुर्की स्थित कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी (पीकेके) का अहम सहयोगी है. पीकेके कुर्दों को अधिकार दिलाने के लिए तुर्की सरकार के खिलाफ लड़ाई लड़ रही है.

सीरियाई गृह युद्ध के दौरान आईएस से लड़ते हुए कुर्दों ने उत्तरी सीरिया में एक स्वायत्त क्षेत्र की स्थापना की है. इस क्षेत्र में करीब दस लाख से ज्यादा कुर्द रहते हैं. आईएस के खिलाफ जिस तरह कुर्दों ने लड़ाई लड़ी है, उससे सीरिया में उनका सैन्य और राजनीतिक वर्चस्व काफी तेजी से बढ़ा है. यह भी कहा जा रहा है कि गृह युद्ध की समाप्ति के बाद सीरिया में जब राजनीतिक हल निकलेगा तब कुर्द सीरिया की सरकार में अहम भूमिका निभाएंगे. तुर्की की सीमा के करीब उत्तरी सीरिया में कुर्दों द्वारा स्थापित किए गए क्षेत्र को भी आधिकारिक मान्यता मिलेगी.

तुर्की की चिंता यह है कि इस सब के बाद तुर्की के आसपास कुर्द मजबूत स्थिति में पहुंच जाएंगे. इससे तुर्की में सरकार के खिलाफ लड़ रहे कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी (पीकेके) जैसे कुर्द संगठनों के हौसले बुलंद होंगे. इन्हें सीरियाई कुर्दों से पूरी मदद मिलेगी और फिर वे तुर्की की सरकार के खिलाफ अपनी लड़ाई और तेज कर देंगे.

इस समस्या से निजात पाने के लिए तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोआन ने एक योजना बनाई और इसे अमेरिका के साथ साझा किया. इसके तहत तुर्की ने उत्तरी सीरिया में अपनी सीमा के नजदीक एक ‘सुरक्षित बफर क्षेत्र’ के निर्माण की बात कही. तुर्की ने कहा कि वह इस बफर क्षेत्र में अपने यहां रह रहे लाखों सीरियाई शरणार्थियों के रहने की व्यवस्था करेगा. ऐसा करके वह एक तीर से दो शिकार करना चाह रहा था. एक तरफ तुर्की सीरियाई शरणार्थियों को वापस उनके देश भी भेज देता और उसके नियंत्रण वाले इस क्षेत्र के निर्माण से सीरियाई कुर्द भी उसकी सीमा से दूर हो जाते.

लेकिन, इस समझौते में दो बातें ऐसी थीं जिन पर सहमति नहीं बनी. तुर्की अपनी सीमा से सटाकर 480 किमी लंबे और सीरिया के अंदर 30 किमी तक चौड़े बफर क्षेत्र के निर्माण की बात कह रहा था. साथ ही वह इस क्षेत्र का नियंत्रण लंबे समय तक अपने हाथ में चाहता था. लेकिन, सीरियाई सरकार और कुर्दों के भारी विरोध के चलते इन दो बातों पर अमेरिका ने हामी नहीं भरी.

तुर्की अमेरिका पर इस समझौते पर तैयार होने के लिए लगातार दबाब बना रहा था. उसका कहना था कि या तो अमेरिका उसके साथ मिलकर इस क्षेत्र का निर्माण करवाए या फिर सीरिया में कुर्दों का साथ छोड़े. जिससे कि वह इस क्षेत्र के निर्माण के लिए उत्तरी सीरिया से कुर्दों को हटा सके.

बीते छह अक्टूबर को एर्दोआन-ट्रंप की फोन पर बातचीत हुई जिसके बाद अमेरिका ने अपनी सेना सीरिया से हटा ली और उधर तुर्की ने कुर्दों के खिलाफ सैन्य अभियान छेड़ दिया. लेकिन जब कुर्दों को अकेला छोड़ने की वजह से डोनाल्ड ट्रंप की दुनियाभर में आलोचना हुई तो उन्होंने जल्दबाजी में तुर्की के साथ एक समझौता कर लिया. नए समझौते पर गौर करें तो तुर्की को अब वही सब मिल रहा है जिसके लिए वह पिछले छह महीने से अमेरिका पर दबाव बना रहा था. वह सीरिया में अपने नियंत्रण वाला सुरक्षित क्षेत्र भी बनाने जा रहा है और कुर्द भी उसकी सीमा से लगे सीरियाई क्षेत्रों को खाली कर रहे हैं.

तुर्की की सीमा से लगे सीरियाई इलाकों से पलायन करते कुर्द परिवार | फोटो : एएफपी

अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छपने की शर्त पर न्यूज़ एजेंसी फॉरेन पॉलिसी से कहा, ‘हकीकत यह है कि अब अमेरिका ने तुर्की के किए को मान्यता दे दी है, उसे इजाजत दे दी है कि वह सीरिया के एक हिस्से पर कब्जा करे और कुर्दों की आबादी को विस्थापित करे...यह तुर्की के लिए एक बहुत बड़ी जीत है...’

सीरिया और इराक में इस्लामिक स्टेट से मुकाबला करने वाली अमेरिकी टीम में रहे पूर्व राजनयिक ब्रेट मैकगर्क भी अमेरिका द्वारा किए गए इस समझौते को तुर्की की बड़ी जीत की तरह देखते हैं. एक ट्वीट में वे लिखते हैं कि इस समझौते के जरिए अमेरिका ने बिना जमीनी हकीकत को समझे तुर्की को इजाजत दे दी है कि वह अपनी सीमा को सीरिया के अंदर 30 किमी तक बढ़ा ले.

कुछ जानकारों के मुताबिक अमेरिका का सीरिया से निकलना और यह समझौता करना कुर्दों के साथ अन्याय करने जैसा भी है. कुर्दों ने कई सालों तक आईएस के खिलाफ लड़ाई लड़ी. इस दौरान उन्होंने अपने 11 हजार सैनिक खो दिए, इस सब के बाद भी उनके हाथ से उनकी खुद की पारंपरिक जमीन भी जा रही है. सत्ताधारी रिपब्लिकन पार्टी के दिग्गज नेता और सीनेटर मिट रोमनी कहते हैं, ‘हमने (अमेरिका ने) कुर्दों के साथ जो किया है वो अमेरिकी इतिहास में एक रक्तपात के रूप में जाना जाएगा.’

एक और गृहयुद्ध की आशंका

कुछ अमेरिकी विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि सीरिया में इस समय जो भी कुछ हो रहा है, उसके चलते वहां आने वाले समय में गृहयुद्ध जैसी एक और जंग देखने को मिल सकती है. इनके मुताबिक ऐसा इसलिए है कि तुर्की सीरिया के अंदर 30 किमी तक एक ऐसा क्षेत्र बनाने जा रहा है जिस पर उसका कब्जा होगा. यही बात आगे जाकर लड़ाई की वजह बनेगी क्योंकि सीरियाई सरकार इसका विरोध कर रही है और इसे अपनी संप्रुभता का उल्लंघन बता रही है. वह आगे जाकर इसका विरोध करेगी जिसमें कुर्द भी उसके साथ होंगे.

इस मामले में अहम यह है कि इस क्षेत्र पर तुर्की के अलावा उन सीरियाई विद्रोहियों और तथाकथित आतंकी संगठनों का भी नियंत्रण होगा जो लंबे समय से सीरिया की सरकार के खिलाफ लड़ रहे हैं और तुर्की इनका सहयोगी है. जानकार कहते हैं कि ऐसे में तुर्की द्वारा बनाया जा रहा यह ‘सुरक्षित बफर क्षेत्र’ भविष्य में एक और गृह युद्ध की नींव रखने जा रहा है.